“₹5 लाख की ‘मासिक भक्ति’! BJP के मंत्री पर वसूली का आरोप, और आरोप भी किसी विपक्षी ने नहीं बल्कि अपने ही मंडल अध्यक्ष ने जड़ दिया”
सीधी जिले की राजनीति इन दिनों किसी व्यंग्य नाटक से कम नहीं लग रही। मंच पर BJP, पात्र भी भाजपा के, और संवाद ऐसे कि सुनने वाला भी पूछ बैठे—“ये हो क्या रहा है?” ताजा मामला मझौली भाजपा मंडल अध्यक्ष प्रवीण तिवारी से जुड़ा है, जिन्होंने सीधे-सीधे जिले के प्रभारी मंत्री और भाजपा नेता अखिलेश जायसवाल पर हर महीने ₹5 लाख की वसूली का गंभीर आरोप लगा दिया है।
BJP मंडल अध्यक्ष प्रवीण तिवारी का कहना है कि मंत्री के “खास” मझौली क्षेत्र के हर अधिकारी और कर्मचारी से नियमित रूप से वसूली करते हैं। आरोप है कि यह रकम हर महीने इकट्ठा की जाती है, लेकिन इसका उपयोग कहां होता है, इसका हिसाब-किताब किसी के पास नहीं है। यानी पैसा तो चलता है, पर रास्ता रहस्यमय बना हुआ है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह पूरा आरोप किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस या मंच से नहीं, बल्कि व्हाट्सएप ग्रुप के रास्ते सामने आया। प्रवीण तिवारी ने ग्रुप में यह जानकारी साझा की और बाकायदा एक पोस्ट भी किया। बस फिर क्या था—पोस्ट ने पंख लगा लिए। देखते ही देखते वही संदेश व्हाट्सएप से निकलकर फेसबुक की गलियों में घूमने लगा और अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन चुका है।
राजनीतिक गलियारों में लोग चुटकी ले रहे हैं कि जब आरोप विपक्ष लगाए तो उसे राजनीति कहा जाता है, लेकिन जब आरोप खुद संगठन के मंडल अध्यक्ष लगाएं तो उसे क्या कहा जाए? कुछ लोग इसे “अंदरूनी आत्ममंथन” बता रहे हैं, तो कुछ इसे “BJP की पारदर्शिता का नया मॉडल” कहकर व्यंग्य कर रहे हैं।

इस पूरे मामले पर जब जिला के मंत्री अखिलेश जायसवाल से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, तो वे कुछ भी कहने से बचते नजर आए। न खंडन, न पुष्टि—बस चुप्पी। और राजनीति में चुप्पी भी कई बार बहुत कुछ कह जाती है।
फिलहाल सवाल यही है कि ₹5 लाख की इस कथित मासिक वसूली की कहानी हकीकत है या सियासी रणनीति? जवाब जो भी हो, इतना तय है कि सीधी जिले की राजनीति को मंडल अध्यक्ष के इस एक पोस्ट ने पूरी तरह से गरमा दिया है। अब देखना यह है कि अगला अंक सफाई का होगा या जांच का—या फिर यह मामला भी बाकी चर्चाओं की तरह सोशल मीडिया की भीड़ में कहीं खो जाएगा।
