1971 युद्ध की यादें,जब फील्ड मार्शल Sam Manekshaw ने पाकिस्तानी युद्धबंदियों से विमान में की ऐतिहासिक बातचीत
भारत व पाकिस्तान के बीच हुए Indo-Pakistani War of 1971 की कई कहानियां आज भी इतिहास के पन्नों में जिंदा हैं। ऐसी ही एक दुर्लभ और मानवीय पहलू को दर्शाती तस्वीर 1972 की है, जब युद्ध के बाद युद्धबंदी अधिकारियों की वापसी के दौरान एक विमान में भारत के फील्ड मार्शल Sam Manekshaw पाकिस्तानी वायुसेना के अधिकारियों से बातचीत करते नजर आए।
वही यह घटना Simla Agreement के बाद की है, जब दोनों देशों के बीच युद्धबंदियों की रिहाई की प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसी दौरान पाकिस्तान वायुसेना के स्क्वाड्रन लीडर अमजद हुसैन और फ्लाइट लेफ्टिनेंट वाजिद खान को भारत से वापस भेजा जा रहा था।
जहा फ्लाइट लेफ्टिनेंट वाजिद खान 1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान की ओर से एयर सपोर्ट मिशन पर थे, लेकिन उनका विमान भारतीय कार्रवाई में क्षतिग्रस्त होकर गिर गया। इसके बाद उन्हें भारत में युद्धबंदी के रूप में रखा गया। रिहाई के बाद उन्होंने पाकिस्तान वायुसेना छोड़ दी और कनाडा जाकर नई जिंदगी शुरू की। आगे चलकर वह कनाडा की संसद के सदस्य भी बने, जो उनके जीवन का एक अनोखा मोड़ साबित हुआ।
स्क्वाड्रन लीडर अमजद हुसैन का मामला भी कम दिलचस्प नहीं है। उनका F-104 स्टारफाइटर विमान अमृतसर के ऊपर उस समय मार गिराया गया था, जब वह भारतीय रडार इंस्टॉलेशन पर हमला करने की कोशिश कर रहे थे। इजेक्शन के बाद उन्हें भारतीय वायुसेना ने हिरासत में लिया और अमृतसर स्थित एयरफोर्स स्टेशन ले जाया गया।
वही अमजद हुसैन के अनुसार, मेडिकल निरीक्षण के दौरान एक भारतीय अधिकारी ने उनसे कहा कि उनकी फायरिंग सटीक थी और उन्होंने रडार एंटेना को नुकसान पहुंचाया, लेकिन भारतीय एंटी-एयरक्राफ्ट गन का निशाना उनसे बेहतर साबित हुआ। यह संवाद दोनों सेनाओं के बीच पेशेवर सम्मान और सैन्य नैतिकता का प्रतीक माना जाता है।
बाद में अमजद हुसैन पाकिस्तान वायुसेना में उच्च पद तक पहुंचे और एयर वाइस मार्शल बने।
जहा यह ऐतिहासिक तस्वीर केवल एक पल को नहीं, बल्कि युद्ध के बाद भी मानवता, सम्मान और पेशेवर आचरण के उदाहरण को दर्शाती है। यह बताती है कि युद्ध भले ही देशों के बीच होता है, लेकिन सैनिकों के बीच सम्मान और गरिमा हमेशा बनी रहती है।

