गुजरात में 6 साल की बच्ची से रेप, 40 दिनों के अंदर केस का निपटारा, POCSO कोर्ट ने आरोपी को मौत की सजा सुनाई
गुजरात के राजकोट POCSO कोर्ट ने अटकोट इलाके में 6 साल की मासूम बच्ची के साथ अमानवीय रेप के मामले में ऐतिहासिक और मिसाल देने वाला फैसला सुनाया है. कोर्ट ने जुर्म के सिर्फ 40 दिनों के अंदर कानूनी प्रक्रिया पूरी करके आरोपी को मौत की सजा सुनाई है.
पुलिस की तुरंत जांच और सरकारी पक्ष की मजबूत दलीलें इस मामले में अहम साबित हुईं, जिससे समाज में एक मिसाल कायम हुई है. यह दिल दहला देने वाली शर्मनाक घटना ग्रामीण राजकोट के अटकोट पुलिस स्टेशन से 18 किलोमीटर दूर प्रतापपुर (नवागाम) के बाहरी इलाके में हुई. शिकायत करने वाले की 6 साल और 8 महीने की बेटी अपने मामा के बगीचे में दूसरे बच्चों के साथ खेल रही थी.
इसी बीच, बाइक पर सवार एक अनजान शख्स बच्ची को उठाकर ले गया और जबरदस्ती उसके प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड डाल दी. फिर हैवान शख्स ने उस मासूम के साथ रेप किया. अटकोट पुलिस स्टेशन में इंडियन पीनल कोड-2023 की धारा 65(2) और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था.पुलिस ऑपरेशन में 200 संदिग्धों से पूछताछ की गई और ‘खिलौनों’ के जरिए पहचान परेड करवाई गई. घटना की गंभीरता को देखते हुए, रेंज आईजी अशोक कुमार और एसपी विजयसिंह गुर्जर के दिशानिर्देश में जांच धोराजी की महिला असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) सिमरन भारद्वाज को सौंपी गई. चूंकि पीड़िता बच्ची डरी हुई थी, इसलिए एक महिला ऑफिसर और एक चाइल्ड वेलफेयर ऑफिसर ने उसकी काउंसलिंग की और आरोपी का हुलिया लिया.
हुलिया के आधार पर, पुलिस ने आस-पास के इलाके में काम करने वाले करीब 200 प्रवासी मज़दूरों से पूछताछ की. आखिर में, अलीराजपुर, मध्य प्रदेश के रहने वाला 32 साल के आरोपी शख्स को डुडवा को गिरफ्तार किया गया. पुलिस पुछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. पुलिस जांच का एक संवेदनशील पहलू यह था कि पहचान परेड के दौरान, हर संदिग्ध को एक खिलौना दिया गया ताकि बच्चे आरोपी को देखकर डरें नहीं. पीड़ित लड़की और उसके साथ खेल रहे बच्चों ने बिना डरे आरोपी की पहचान कर ली.
इस केस में पुलिस ने सिर्फ 12 दिन के कम समय में सारे मेडिकल, फोरेंसिक और डॉक्यूमेंट्री सबूत इकट्ठा करके कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी. घटना की जगह से आरोपी के बाल मिले, जिसकी फोरेंसिक रिपोर्ट अहम सबूत साबित हुई. इस केस में एफएसएल अफसर ने मौके का दौरा किया और मेडिकल रिपोर्ट तुरंत मिल गई. पीड़ित लड़की के पिता ने चिट्ठी लिखकर इंसाफ की गुहार लगाई थी. सरकारी पक्ष ने भी केस को फास्ट ट्रैक पर चलाने के लिए रोजाना सुनवाई की मांग की.
इस केस में डिस्ट्रिक्ट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर एसके वोरा और सहायक लोक अभियोजक पीके पटेल ने मजबूत दलीलें दीं. गवाह और सबूत समय पर कोर्ट में पेश हों, इसके लिए पुलस सब इंस्पेक्टर पीएन भरवाड़ को नोडल अफसर बनाया गया था. थर्ड एडिशनल सेशन और डिस्ट्रिक्ट कोर्ट POCSO कोर्ट के जज वीए राणा ने दोनों पक्षों की दलीलों और मजबूत सबूतों को देखते हुए आरोपी को दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई है.
चार्जशीट फाइल होने के 29 दिन और एफआईआर होने के 40 दिन के अंदर केस निपटा दिया गया. स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर एसके वोरा के मुताबिक, मौत की सजा पर अमल के लिए हाई कोर्ट की मंजूरी जरूरी होगी. इस फैसले ने समाज को एक कड़ा संदेश दिया है कि बच्चों के खिलाफ अपराध किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे.
