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8 साल का राजनीतिक ‘यू-टर्न’! 2018 में प्रभारी दीपक बावरिया विवाद में नोटिस झेलने वाले डॉ. विनोद शर्मा, 2026 में खुद बने मारपीट के शिकार

अमित श्रीवास्तव

By अमित श्रीवास्तव

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8 साल का राजनीतिक ‘यू-टर्न’! 2018 में प्रभारी दीपक बावरिया विवाद में नोटिस झेलने वाले डॉ. विनोद शर्मा, 2026 में खुद बने मारपीट के शिकार; ‘सामंतवाद’ टिप्पणी फिर बनी विवाद की वजह

सीधी। सीधी जिले के जवाहर कांग्रेस भवन में कांग्रेस की मासिक समीक्षा बैठक के बाद विधानसभा प्रभारी डॉ. विनोद शर्मा के साथ हुई कथित धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और बदसलूकी का मामला अब नया राजनीतिक मोड़ ले चुका है। शनिवार को इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया, जिसमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं और डॉ. विनोद शर्मा के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति दिखाई दे रही है। वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी एक बार फिर चर्चा में है।

यह विवाद मंगलवार को बैठक समाप्त होने के बाद शुरू हुआ। उस समय पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं चुरहट विधायक अजय सिंह राहुल, जिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्ञान सिंह सहित अन्य नेता बैठक में मौजूद थे। आरोप है कि अजय सिंह राहुल के रवाना होते ही विजय सिंह और कमलेन्द्र सिंह ने डॉ. विनोद शर्मा से बहस शुरू कर दी, जो गाली-गलौज और छीनाझपटी तक पहुंच गई। घटना के बाद कांग्रेस ने दोनों कार्यकर्ताओं को आजीवन निष्कासित कर दिया।

बताया जा रहा है कि विवाद की पृष्ठभूमि डॉ. विनोद शर्मा की उस फेसबुक पोस्ट से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने लिखा था कि “प्रदेश अध्यक्ष सामंतवादी नहीं होना चाहिए।” इस टिप्पणी को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग अर्थ निकाले गए। कुछ कार्यकर्ताओं ने इसे अजय सिंह राहुल और दिग्विजय सिंह जैसे राजघराने से जुड़े नेताओं पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी माना। हालांकि डॉ. शर्मा ने बाद में अपनी पोस्ट का स्पष्टीकरण भी जारी किया था, लेकिन विवाद शांत नहीं हुआ।

डॉ. विनोद शर्मा ने कहा, “अजय सिंह राहुल जी के रवाना होने के बाद दोनों कार्यकर्ता मेरे पास आए, बहस की, अपशब्द कहे और मेरे साथ अभद्रता की।” वहीं जिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्ञान सिंह ने कहा कि संगठन ने अनुशासनहीनता को गंभीरता से लेते हुए दोनों कार्यकर्ताओं के खिलाफ आजीवन निष्कासन की कार्रवाई की है।

2018 की घटना से जुड़ रहा है मामला

इस घटनाक्रम के बाद वर्ष 2018 का रीवा विवाद भी चर्चा में आ गया है। उस समय कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया के साथ रीवा सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद धक्का-मुक्की हुई थी। विवाद की पृष्ठभूमि भी अजय सिंह राहुल के मुख्यमंत्री पद को लेकर पूछे गए सवाल से जुड़ी थी। मामले की जांच के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस ने छह कार्यकर्ताओं को पार्टी से निष्कासित किया था, जबकि रीवा के दो स्थानीय नेताओं—विनोद शर्मा और चक्रधर सिंह जाबा—को कार्यकर्ताओं को भड़काने के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

अब 8 साल बाद राजनीतिक घटनाक्रम ने उल्टा मोड़ ले लिया है। 2018 में जिस डॉ. विनोद शर्मा पर तत्कालीन प्रभारी के खिलाफ कार्यकर्ताओं को उकसाने का आरोप लगा था, वहीं 2026 में वे स्वयं कांग्रेस के विधानसभा प्रभारी रहते हुए कथित बदसलूकी और धक्का-मुक्की के शिकार होने का दावा कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह भी है कि दोनों घटनाओं में अजय सिंह राहुल से जुड़ा विवाद और ‘सामंतवाद’ जैसे मुद्दों की चर्चा प्रमुख कारणों में सामने आई है। इससे कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और गुटबाजी पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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