कागज़ों में स्वस्थ, हकीकत में कुपोषित! कुसमी NRC में ‘फर्जी फॉलोअप’ ने खोली सरकारी पोषण व्यवस्था की पोल
सरकारी योजनाओं के ज़रिये कुपोषण से जंग लड़ने के दावे ज़मीन पर कितने खोखले हैं, इसका ताज़ा उदाहरण कुसमी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में संचालित न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर NRC में सामने आया है। शनिवार दोपहर एसडीएम विकास कुमार आनंद के औचक निरीक्षण ने उस व्यवस्था की परतें उधेड़ दीं, जो कागज़ों में तो बच्चों को “स्वस्थ” दिखा रही थी, लेकिन हकीकत में मासूम अब भी कुपोषण की गिरफ्त में थे।
निरीक्षण के दौरान NRC में 6 कुपोषित बच्चे भर्ती मिले, लेकिन इलाज और देखभाल की हालत देखकर प्रशासन भी हैरान रह गया। केंद्र में साफ-सफाई बदहाल पाई गई और पोषण मानकों का पालन केवल फाइलों तक सीमित नजर आया। सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि 12 दिन तक भर्ती रहने के बावजूद बच्चों के वजन और पोषण स्तर में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। यह स्थिति बताती है कि पोषण आहार, दवाइयों और देखरेख की व्यवस्था या तो लापरवाही का शिकार है या फिर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है।
निरीक्षण में असली सनसनी तब मची, जब बच्चों की केस डायरी और फॉलोअप रजिस्टर की जांच की गई। रिकॉर्ड में 26 दिसंबर की तारीख के बावजूद 29 दिसंबर तक का फॉलोअप पहले से दर्ज मिला। यानी बच्चों का इलाज भविष्य में भी कागज़ों में हो चुका था। इस “फर्जी फॉलोअप” ने सरकारी पोषण व्यवस्था की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
प्रशासनिक स्तर पर इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम ने एनआरसी की इंचार्ज एएनएम सरोज कोरी और इंचार्ज मेडिकल ऑफिसर डॉ. सृष्टि कुशवाहा को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुधीर गुप्ता से भी पूरे मामले में विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है।
