Sidhi news:“डॉक्टर बनने का सपना और बंद दरवाज़े,बैगा बेटी अनामिका की गुहार, मुख्यमंत्री से मिलने से रोकी गई, सरकार के दावों पर उठे सवाल”
Sidhi news:सीधी जिले के ग्राम डेवा की रहने वाली अनामिका बैगा की कहानी आज सिर्फ एक छात्रा की नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर करती है। आदिवासी बैगा समुदाय से आने वाली अनामिका ने मेडिकल की पढ़ाई कर डॉक्टर बनने का सपना देखा था, लेकिन गरीबी और व्यवस्था की अनदेखी ने उसके सपनों के रास्ते में बड़ी दीवार खड़ी कर दी है।
अनामिका हाल ही में मुख्यमंत्री से मिलने पहुंची थी, ताकि वह अपनी पढ़ाई को लेकर मदद की गुहार लगा सके। लेकिन उसका आरोप है कि सुरक्षा कर्मियों ने उसे मुख्यमंत्री से मिलने नहीं दिया। अनामिका का कहना है कि वह बेहद गरीब परिवार से आती है और उसके पिता मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। ऐसे में मेडिकल जैसी महंगी पढ़ाई का खर्च उठाना उनके परिवार के लिए असंभव है।
Sidhi news:अनामिका ने बताया कि बैगा प्रोजेक्ट के तहत सरकार ने आदिवासी बच्चों को शिक्षा में सहयोग देने की बात कही थी, लेकिन हकीकत में उसकी पढ़ाई का खर्च सरकार नहीं उठा रही है। उसने विधायक, सांसद और कलेक्टर से कई बार संपर्क किया, आवेदन दिए, अपनी स्थिति बताई, लेकिन हर जगह से उसे सिर्फ आश्वासन ही मिले, ठोस मदद नहीं।
अनामिका का दर्द छलक पड़ा जब उसने कहा, “मेरे पिता मेहनत-मजदूरी करते हैं। मैं इतना बोझ उन पर नहीं डाल सकती कि वे मुझे डॉक्टर बना सकें। इसलिए मैंने सरकार से मदद मांगी, लेकिन आज तक मेरी कोई सुनवाई नहीं हुई।”
उसका कहना है कि अगर समय रहते मदद नहीं मिली तो उसका डॉक्टर बनने का सपना अधूरा ही रह जाएगा।
वहीं पूरे मामले पर सीधी जिले के प्रभारी मंत्री दिलीप जायसवाल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार सभी को पढ़ाई में सहयोग करेगी और जो भी संभव होगा, मदद की जाएगी। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अनामिका को किस तरह और कब तक सहायता दी जाएगी। इस अस्पष्ट बयान के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

