रेल स्टॉपेज और स्टेशन दर्जे की मांग को लेकर भदौरा में उग्र आंदोलन, 4 घंटे से रेल यातायात ठप
सीधी।
रेल स्टॉपेज और शंकरपुर–भदौरा रेलवे स्टेशन को पूर्ण स्टेशन का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर भदौरा गांव में मंगलवार को जनआक्रोश फूट पड़ा। महिलाओं सहित हजारों की संख्या में ग्रामीण रेलवे लाइन की पटरी पर बैठ गए, जिससे बीते चार घंटे से रेल आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। आंदोलन में आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में शामिल हैं और स्थानीय नेता आनंद सिंह दद्दुआ के समर्थन में आंदोलन लगातार जारी है।
प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है। कई थानों का पुलिस बल मौके पर तैनात है, वहीं थाना प्रभारी स्वयं घटनास्थल पर मौजूद रहकर हालात पर नजर बनाए हुए हैं। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन सतर्क दिखाई दे रहा है।
बताया जा रहा है कि जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित भदौरा गांव में वर्षों से सिंगरौली, कटनी सहित अन्य प्रमुख रूटों पर चलने वाली ट्रेनों के स्थायी स्टॉपेज और स्टेशन को पूर्ण दर्जा देने की मांग की जा रही है। इससे पहले भी ग्रामीणों द्वारा कई बार आंदोलन किए गए, लेकिन हर बार रेलवे अधिकारियों द्वारा आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त करा दिया गया। इसके बावजूद बार-बार पत्राचार और मांगों के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
स्थानीय नेता आनंद सिंह दद्दुआ ने अपने बयान में कहा कि भदौरा क्षेत्र के हजारों लोग रोजमर्रा की जरूरतों, इलाज, शिक्षा और रोजगार के लिए रेल पर निर्भर हैं, लेकिन स्टॉपेज न होने के कारण उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे प्रशासन लगातार सिर्फ आश्वासन देता रहा, जबकि जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ। दद्दुआ ने स्पष्ट कहा कि जब तक रेल स्टॉपेज और स्टेशन का दर्जा नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने इसे और प्रभावशाली बना दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास और बुनियादी सुविधाओं के लिए है।
