मुख्यमंत्री जन विश्वास शिविर में 40 फरियादी, 280 से ज्यादा कर्मचारी; समस्याओं के बीच मोबाइल में व्यस्त दिखे अधिकारी
सीधी। सीधी जिले के जोरौंधा बाईपास स्थित सब्जी मंडी परिसर में शुक्रवार दोपहर 3 बजे मुख्यमंत्री जन विश्वास शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं का मौके पर ही निराकरण करना था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर प्रदेशभर में आयोजित किए जा रहे इन शिविरों में लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने के बजाय एक ही स्थान पर अपनी समस्याओं का समाधान उपलब्ध कराने की बात कही गई थी।
हालांकि, सीधी में आयोजित शिविर की तस्वीर कुछ अलग नजर आई। शिविर में बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे, लेकिन मौके पर पहुंचे लोगों की संख्या बेहद कम रही। जानकारी के अनुसार, करीब 40 लोगों ने ही अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं, जबकि विभिन्न शासकीय विभागों के 280 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी शिविर में मौजूद बताए गए।
सबसे ज्यादा चर्चा का विषय शिविर में अधिकारियों और कर्मचारियों का मोबाइल चलाते नजर आना रहा। स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग सहित अन्य विभागों के कर्मचारी कई जगह मोबाइल में व्यस्त दिखाई दिए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब शिविर का उद्देश्य लोगों की समस्याओं का तत्काल समाधान करना था, तो अधिकारी-कर्मचारियों की इतनी बड़ी संख्या होने के बावजूद आम लोगों की भागीदारी इतनी कम क्यों रही।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आसपास के क्षेत्र में शिविर के आयोजन की पर्याप्त जानकारी लोगों तक नहीं पहुंच सकी। यही वजह रही कि जिस शिविर में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने और शिकायतों के तत्काल निराकरण की उम्मीद थी, वहां अपेक्षाकृत कम संख्या में फरियादी पहुंचे।
एक तरफ करीब 40 लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे, वहीं दूसरी तरफ 280 से ज्यादा कर्मचारियों की मौजूदगी ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। लोगों का कहना है कि यदि शिविर की जानकारी पहले से व्यापक स्तर पर दी जाती तो बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय नागरिक अपनी समस्याएं लेकर पहुंच सकते थे।
वहीं मामले को लेकर जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह सोलंकी से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने इस संबंध में बात करने से इनकार कर दिया।
अब सवाल यही है कि जब मुख्यमंत्री जन विश्वास शिविर का मकसद जनता को तत्काल राहत और समस्याओं का समाधान देना है, तो सीधी में आयोजित शिविर में फरियादियों से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों की मौजूदगी और मोबाइल में व्यस्त नजर आती तस्वीरें इस व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं।