Sidhi news:राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार, जिले के 72.5% बच्चे और 55.8% गर्भवती महिलाएँ एनीमिया से पीड़ित हैं। इस चुनौती को स्वीकारते हुए ऋषिकेश फ़ाउण्डेशन की ‘मोगली पलटन’ ने महाशिवरात्रि पर ‘त्योहार का व्योहार’ अभियान के तहत 51 कन्याओं को ‘शक्ति बक्सा – एनीमिया कवच’, नारियल के गमले में मीठी नीम और एक प्रेरक संदेश पत्र भेंट किया।
ICMR-NIN के मानकों पर आधारित वैज्ञानिक पोषण
ICMR-NIN के अनुसार, 10-18 वर्ष की किशोरी को प्रतिदिन 28-30mg आयरन और 45-65mg विटामिन-सी अनिवार्य है। मोगली पलटन का ‘शक्ति बक्सा’ इसी मानक पर आधारित है:
•आयरन व विटामिन-सी संगम: महुआ-तिल के लड्डू और चिक्की आयरन की 40% जरूरत पूरी करते हैं।
•अवशोषण: मेडिकल साइंस के अनुसार, विटामिन-सी की उपस्थिति में ही आयरन शरीर द्वारा अवशोषित किया जाता है। बक्से की आंवला, बेल और बेर कैंडी विटामिन-सी की 90% आपूर्ति कर हीमोग्लोबिन बढ़ाती हैं।
बक्से की विशेषता: देशज, स्वादिष्ट और सुलभ
‘शक्ति बक्सा’ को स्थानीय और ग्रामीण क्षेत्रों में सुलभ देशज सामग्रियों से तैयार किया गया है। ये ‘सुपरफूड’ पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ अधिक शेल्फ लाइफ रखते हैं। इसे ‘स्वादिष्ट उपहार’ का स्वरूप दिया गया है ताकि बच्चे इसे चाव से खाएं।
संदेश पत्र व नारियल गमला और मीठी नीम: जागरूकता और स्थाई समाधान
संदेश पत्र: यह पत्र बालिकाओं को पोषण के प्रति जागरूक और आत्मनिर्भर बनने हेतु ‘शक्ति बक्सा’ के सेवन की विधि व स्वदेशी आहार का महत्व समझाता है।
मीठी नीम: नारियल के प्राकृतिक गमले में भेंट किया गया यह पौधा आयरन और फॉलिक एसिड का स्थाई स्रोत है, जो पर्यावरण और सेहत दोनों की रक्षा करता है।
त्योहार का व्योहार: एक नई परंपरा
Sidhi news:मोगली पलटन की यह पहल त्योहारों के वैज्ञानिक और सामाजिक आधार को उजागर करती है। ‘शक्ति बक्सा’, ‘मीठी नीम’ और ‘संदेश पत्र’ का यह संगम किशोरियों को ‘निडर’, स्वस्थ और ऊर्जावान बनाने का एक विनम्र प्रयास है।


