रासलीला में भक्त मीरा के प्रसंग का हुआ अद्भुत मंचन
17 से 26 फरवरी तक होगा श्रीराधाकृष्ण लीला का मंचन
रासलीला देखने भारी संख्या में पहुंच रहे हैं दर्शक
सीधी
शहर के उर्मिलेश्वर धाम तिलक नगर पडऱा में आयोजित श्रीराधाकृष्ण रासलीला का आयोजन 17 फरवरी से परम पूज्य दंण्डी स्वामी निर्भयानंद सरस्वती जी महराज के परम सानिध्य में किया जा रहा है। श्रीराधा कृष्ण लीला के तीसरे दिन भक्त मीरा के चरित्र का अद्भुत मंचन किया गया।
रासलीला में सर्वप्रथम वृन्दावन धाम के निकुंज में श्रीराधा कृष्ण एवं अष्ठ साखियों के साथ रासलीला का मंचन किया गया और श्रीयुगल सरकार की आरती में राष्ट्रीय लोक गायिका मान्या पाण्डेय, प्रतापगढ़ से आये आचार्य जनार्दनाचार्य जी स्वामी, समाजसेवी संतोष सिंह, विनय कुमार सिंह परिहार, अधिवक्ता केके पाण्डेय, दिलीप सितानी, नगर निरीक्षक सिटी कोलवाली सीधी अभिषेक उपाध्याय, हरिश्चंद मिश्रा आदि ने शामिल होकर श्रीराधाकृष्ण के स्वरूप से आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस दौरान राष्ट्रीय लोक गायिका मान्या पाण्डेय और उनके साथ कलाकार कपिल तिवारी, योगेश कुमार, सुखदेव के द्वारा भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी। मान्या पाण्डेय ने बड़ा ऊधम कियों मुरलीबाला, मइया तोरों प्यारो प्यारों लाला, हमरो महराज तारणहार हो, विपदा सबकी टारे, जादू भरे नैन, ओ हमारे मोहना जुलूम तोर नैन के साथ स्वामी हरिदास जी का पद किशोरी तोरे चरणन की रज पाऊं आदि भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी। इस दौरान परम पूज्य दंण्डी स्वामी निर्भयानंद सरस्वती जी महराज के द्वारा राष्ट्रीय लोक गायिका मान्या पाण्डेय को सम्मानित भी किया गया।
रासलीला में भक्त मीरा चरित्र की मनमोहक प्रस्तुति की गई। जिसमें बचपन से ही मीरा भगवार श्रीकृष्ण की भक्त हो गईं थीं। उनका विवाह मेवाड़ के सिसोदिया राजपरिवार में महाराणा सांगा के कुंवर भोजराज से हुआ, लेकिन कुछ ही वर्षों में वे विधवा हो गईं। मीरा कृष्ण को ही अपना पति मानती थीं। उन्होंने मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई के भाव से अपना जीवन समर्पित कर दिया।
ससुराल वालों ने उन्हें कृष्ण भक्ति से रोकने के लिए बहुत प्रताडि़त किया। उन्हें जहर देने की कोशिश की गई, लेकिन मान्यता है कि कृष्ण ने विष को अमृत बना दिया। मीरा ने संत रविदास को अपना गुरु बनाया और सांध्य-संगति में संतों के साथ नृत्य गायन किया। ससुराल के अत्याचारों से तंग आकर वे मेड़ता और फिर वृंदावन चली गईं। अंत में वे द्वारका में रणछोड़ जी कृष्ण की मूर्ति में विलीन हो गईं। आदि विषयों का अद्भुत मंचन वृंदावन के कलाकारों के द्वारा किया गया।
उक्त रासलीला में ठाकुर जी श्रीकृष्ण की भूमिका दीवेश शर्मा, श्री जी की भूमिका नैतिक शर्मा, श्री जी की अष्ट सखियों की भूमिका में करण शर्मा, गोविंद शर्मा, रवि शर्मा, राजू शर्मा, देव कुमार शर्मा, रामवीर शर्मा ने मनमोहक प्रस्तुति दी। इसके साथ ही कान्हा जी दिगंबर शर्मा, हरीष शर्मा, छोटू मिश्रा, ऋषि मिश्रा द्वारा अभिनय किया गया।

