आरबीसी प्रकरणों की रफ्तार थमी, बिचौलियों की चांदी,सिहावल तहसील चर्चा मे…
कार्यालय में सन्नाटा, गलियारों में फुसफुसाहट: सिहावल तहसील की हकीकत
जनता परेशान, फाइलें लाचार: सिहावल तहसील में व्यवस्था बेअसर
राजबहोर केवट सिंहावल
सीधी जिले के सिहावल तहसील एवं एसडीएम कार्यालय इन दिनों आम जनता की सेवा से ज्यादा लापरवाही और अव्यवस्था के लिए चर्चाओं में है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्यालय का हाल ऐसा है मानो समय की घड़ी यहां दोपहर 2 बजे के बाद ही चलती हो। इससे पहले कर्मचारी मिल जाएं तो इसे संयोग ही माना जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी और कर्मचारी अधिकत्तर जिले में निवास करतें हैं जिसके कारण समय पर कार्यालय नहीं पहुंचते।
नतीजा यह रहा की नामांतरण, सीमांकन, जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र जैसे जरूरी कार्य महीनों तक फाइलों में धूल खाते रहते हैं।
मामला यहीं तक सीमित नहीं है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि तहसील और एसडीएम कार्यालय में आरबीसी (राजस्व पुस्तक परिपत्र) के कई प्रकरण कोटबार दलालों की सक्रियता के कारण वर्षों से लंबित पड़े हैं।
बिना “मध्यस्थों” के फाइल आगे नहीं बढ़ती,ऐसी चर्चाएं आम हो चली हैं। पीड़ित परिवारों का कहना है कि आपदा राहत और मुआवजा जैसे संवेदनशील मामलों में भी देरी हो रही है, जिससे जरूरतमंदों को समय पर सहायता नहीं मिल पा रही।
लोगों का सवाल है कि जब सरकारी कार्यालय जनता की सुविधा के लिए हैं, तो फिर आम आदमी को बार-बार चक्कर क्यों लगाने पड़ते हैं? आखिर क्यों दलाल संस्कृति खुलेआम पनप रही है?
राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे पर खामोशी छाई हुई है। सत्ता पक्ष पर निष्क्रियता के आरोप लग रहे हैं, जबकि विपक्ष भी इस मुद्दे पर मुखर नजर नहीं आ रहा।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं कि वह इन आरोपों की जांच कर व्यवस्था में सुधार लाता है या फिर सिहावल कार्यालय की कार्यप्रणाली यूं ही सवालों के घेरे में बनी रहती है।

