20 साल से अंधेरे में ‘देवरक्ष’, खड्डी खुर्द में खंभा 1 किमी दूर, पेड़ों के सहारे चल रही बिजली, हादसे का खतरा बरकरार
एमपी के खड्डी खुर्द की ग्राम देवरक्ष बस्ती में बीते दो दशकों से बिजली व्यवस्था मज़ाक बनकर रह गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि कनेक्शन तो दे दिए गए, बिल भी नियमित आता है, लेकिन बिजली का खंभा गांव से करीब एक किलोमीटर दूर खड़ा है। ऐसे में लोग निजी इंतज़ाम कर तार खींचकर किसी तरह घरों तक रोशनी पहुंचाते हैं। बरसात और गर्मी के मौसम में यह जुगाड़ जानलेवा साबित हो सकता है।
जहा अब ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरी में पेड़ों को काटकर लकड़ी के अस्थायी खंभे बनाने पड़ते हैं। इससे एक ओर जंगल विभाग की कार्रवाई और जुर्माने का डर रहता है, तो दूसरी ओर लकड़ी के खंभे जल्दी सड़-गल जाते हैं। आवारा पशु और जंगली जानवर तारों को तोड़ देते हैं, जिससे कई बार करंट फैलने की स्थिति बन चुकी है। ग्रामीण बताते हैं कि अब तक कई हादसे होते-होते टले हैं।
वही स्थानीय निवासी लीला साहू ने बताया कि देवरक्ष में लगभग 20 परिवार रहते हैं। “बिल समय पर आता है, लेकिन खंभे नहीं हैं। एक किलोमीटर दूर से तार लाना पड़ता है। कई बार तार टूट जाते हैं और लोगों को करंट लग जाता है। अधिकारियों और कर्मचारियों को कई बार सूचना दी, लेकिन आज तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई,” उन्होंने कहा। अंधेरे में जीवन यापन कर रहे परिवारों में बच्चों की पढ़ाई और महिलाओं की सुरक्षा भी बड़ी चिंता बनी हुई है।
जहा इस पूरे मामले में सीधी जिले के मुख्य अभियंता जन्मेजय सिंह ने कहा कि उन्हें फिलहाल इस घटनाक्रम की जानकारी नहीं है। “क्षेत्रीय कर्मचारियों को निर्देशित कर जांच कराई जाएगी। शासन के नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारा पहला उद्देश्य है,” उन्होंने भरोसा दिलाया।
वही ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि देवरक्ष में जल्द स्थायी बिजली के खंभे और सुरक्षित लाइन बिछाई जाए, ताकि 20 साल से चली आ रही यह समस्या खत्म हो और गांव को सुरक्षित व नियमित बिजली मिल सके।

