अचानक सीधी पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, अधिकारियों को लगाई फटकार“मैदान छोड़ बल्लभ भवन में बैठे”, विरोध से पहले नेताओं-पीड़ितों से मुलाकात, शिवसेना नेता नजरबंद
एमपी के सीधी जिले में रविवार को उस समय प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई जब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बिना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अचानक सर्किट हाउस पहुंचे। इस आकस्मिक दौरे में मुख्यमंत्री ने जहां जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की, वहीं अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई।
अब मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि कई अधिकारियों की शिकायतें उन्हें लगातार मिल रही थीं। उन्होंने कहा, “जिन अधिकारियों की मैदानी शिकायतें सामने आ रही हैं, वे मैदान में रहने के बजाय बल्लभ भवन में बैठे हैं।” इस बयान को जिले के प्रशासनिक अमले के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि वे अचानक दौरे पर पहुंचे हैं और विभिन्न कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों से चर्चा की है, जिसके परिणाम शाम तक सामने आ सकते हैं।
वही सर्किट हाउस में मुख्यमंत्री ने मंडल अध्यक्षों से लेकर स्थानीय नेताओं तक से चर्चा की। साथ ही 24 मार्च को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ अहम बैठक की। यह प्रदर्शन जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह सोलंकी के खिलाफ प्रस्तावित था, जिसमें विभिन्न जनपद पंचायतों के सरपंच, सचिव और सदस्य शामिल होने वाले थे। आंदोलन के नेतृत्वकर्ताओं नारायण तिवारी, रजनी तिवारी और अंबुज पांडे से भी मुख्यमंत्री ने सीधा संवाद किया।
इसी अब दौरान डीजे प्लाजा प्रकरण से जुड़े पीड़ित भी मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे। उन्होंने आवेदन सौंपते हुए अपनी समस्याएं रखीं। पीड़ित बादल चौरसिया ने आरोप लगाया कि उनका घर गिरा दिया गया और उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया।
कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने शिवसेना प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे को कॉफी हाउस में नजरबंद कर दिया। उनके साथ जिला अध्यक्ष नाम सिंह बघेल और अन्य कार्यकर्ता भी पुलिस निगरानी में मौजूद रहे।
जहा मुख्यमंत्री का यह अचानक दौरा जिले के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है और प्रस्तावित आंदोलन का रुख क्या होता है।

