तीन साल के इंतजार के बाद लौटी खुशखबरी,नर घड़ियाल की वापसी से सोन अभयारण्य में फिर शुरू हुआ प्रजनन चक्र
सीधी जिले के सोन घड़ियाल अभयारण्य में तीन साल से ठप पड़े प्रजनन चक्र ने आखिरकार फिर रफ्तार पकड़ ली है। अधीक्षक प्रमोद सिंह के मुताबिक, हाल ही में सात मादा घड़ियालों द्वारा अंडे दिए जाने की पुष्टि हुई है, जो अभयारण्य के लिए बड़ी राहत और उम्मीद की खबर है।
दरअसल पिछले तीन साल पहले अभयारण्य का एकमात्र नर घड़ियाल सोन नदी के बहाव में बहकर बिहार चला गया था। इसके बाद यहां प्रजनन पूरी तरह से रुक गया था। स्थिति सुधारने के प्रयास में फरवरी 2025 में चंबल से एक नर घड़ियाल लाया गया, लेकिन वह भी बहकर उत्तरप्रदेश पहुंच गया। उसे वापस लाने की कोशिश के दौरान उसकी मौत हो गई, जिससे वन विभाग को बड़ा झटका लगा।
वही इसके बाद करीब चार महीने पहले एक बार फिर प्रयास करते हुए एक परिपक्व नर घड़ियाल को सीधी लाया गया। इस बार की पहल सफल साबित हुई और अब उसके परिणाम सामने आने लगे हैं। अधीक्षक प्रमोद सिंह ने बताया कि नर की मौजूदगी के बाद मादा घड़ियालों में प्रजनन गतिविधियां तेजी से बढ़ीं और सात मादाओं ने अंडे दिए हैं।
अब मादा घड़ियालों ने सोन नदी के किनारे सुरक्षित रेतीले स्थानों का चयन कर अंडे दिए हैं और उनकी लगातार निगरानी कर रही हैं। वन विभाग की टीम भी इन स्थानों पर चौकसी बरत रही है, ताकि अंडों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
जहा विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च-अप्रैल प्रजनन का उपयुक्त समय होता है और 60 से 70 दिनों में अंडों से बच्चे निकलते हैं। ऐसे में मई-जून तक नई पीढ़ी के घड़ियाल अभयारण्य में नजर आ सकते हैं।
वही प्रमोद सिंह के अनुसार, यह सफलता संरक्षण और सतत प्रयासों का परिणाम है। यदि इसी तरह प्रबंधन जारी रहा, तो सोन घड़ियाल अभयारण्य एक बार फिर घड़ियालों के लिए सुरक्षित और समृद्ध आवास के रूप में उभर सकता है।

