जिले के सिहावल विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में स्थापित मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। योजना का उद्देश्य जहां अधिक आवागमन वाले क्षेत्रों में रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित करना था, वहीं जमीनी स्तर पर कई खामियां सामने आ रही हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, एक-एक सोलर स्ट्रीट लाइट की लागत लगभग 1 लाख 4 हजार रुपये से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक बताई जा रही है। इसके बावजूद कई स्थानों पर लाइटें लगने के बाद से ही बंद पड़ी हैं, जबकि कुछ जगहों पर आधी लाइटें चालू हैं और आधी पूरी तरह से खराब स्थिति में हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्थानों पर लाइटें आवश्यकता के अनुसार न लगाकर मनमाने तरीके से स्थापित की गई हैं। इतना ही नहीं, स्थापना के बाद इनकी निगरानी या मरम्मत के लिए भी कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौके पर नहीं पहुंचा।
बताया जा रहा है कि इन कार्यों के लिए सांसद निधि या विधायक निधि का उपयोग किया गया है, जिससे अब पारदर्शिता और गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सिहावल विधानसभा के मुख्य चौराहे की स्थिति भी इसी प्रकार की बताई जा रही है, जहां कई लाइटें शुरुआत से ही बंद हैं।
उठ रहे प्रमुख सवाल:
क्या कार्य में गुणवत्ता का ध्यान रखा गया?
क्या भुगतान के बाद निगरानी पूरी तरह नजरअंदाज कर दी गई?
क्या इसमें किसी प्रकार की अनियमितता या कमीशनखोरी शामिल है?
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यह सीधे-सीधे जनता के टैक्स के पैसे से जुड़ा मामला है, इसलिए जवाबदेही तय होना जरूरी है।

