उपार्जन केंद्र पर सीएम का औचक निरीक्षण, किसानों से किया सीधा संवाद
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार सुबह अपने वादे को निभाते हुए खरगोन जिले के कतरगांव स्थित गेहूं उपार्जन केंद्र का औचक निरीक्षण किया। बिना पूर्व सूचना पहुंचे मुख्यमंत्री ने यहां व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया और किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं जानीं। इस दौरान उन्होंने किसानों के साथ चाय भी पी और मौके पर मौजूद अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने एक दिन पहले महेश्वर प्रवास के दौरान संकेत दिया था कि वे किसी भी उपार्जन केंद्र का अचानक निरीक्षण कर सकते हैं। उसी क्रम में यह दौरा किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने तौल व्यवस्था, बारदाना उपलब्धता, गुणवत्ता परीक्षण और किसानों के बैठने-ठहरने की सुविधाओं का निरीक्षण किया।
मध्यप्रदेश के सरकार द्वारा उपार्जन केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए छाया, बैठने की व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। अब किसान जिले के किसी भी उपार्जन केंद्र पर अपनी उपज बेच सकते हैं। तौल में देरी न हो, इसके लिए केंद्रों पर तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर छह कर दी गई है और आवश्यकता अनुसार इसे और बढ़ाया जा रहा है।
वही इसके अलावा गेहूं की गुणवत्ता मानकों में भी राहत दी गई है। चमक विहीन गेहूं की सीमा 50 प्रतिशत तक, सूकड़े दानों की सीमा 6 से बढ़ाकर 10 प्रतिशत और क्षतिग्रस्त दानों की सीमा 6 प्रतिशत तक निर्धारित की गई है। उपार्जन केंद्रों पर बारदाना, तौल कांटे, हम्माल, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्शन, कूपन प्रणाली और सफाई उपकरण जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
गेहूं उपार्जन के आंकड़े प्रदेश में अब तक 9.83 लाख किसानों ने 60.84 लाख मीट्रिक टन गेहूं विक्रय के लिए स्लॉट बुक किए हैं। वहीं 5,08,657 किसानों से 22.70 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। पिछले वर्ष 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हुआ था, जबकि इस वर्ष सरकार ने 100 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया है।
वही किसानों के हित में सरकार की सक्रियता और व्यवस्थाओं की निगरानी को लेकर मुख्यमंत्री का यह औचक निरीक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

