ताला खुला, दफ्तर खाली: महान परियोजना कार्यालय में जनता भटकी, अफसरों की कुर्सियां रहीं सूनी
सीधी जिले के महान परियोजना अंतर्गत संचालित कार्यालय की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। गुरुवार सुबह करीब 11 बजे कार्यालय का निरीक्षण करने पहुंचे ग्रामीणों और स्थानीय लोगों को वहां अव्यवस्था का आलम देखने को मिला। कार्यालय का ताला तो खुला था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी नदारद मिले। इससे दूर-दराज से अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
ग्रामीण सत्यवान ने बताया कि उनकी जमीन से एक छोटी नहर निकली हुई है, जिससे संबंधित समस्या को लेकर वह कई बार अधिकारियों के समक्ष शिकायत कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि कई बार कार्यालय आने के बावजूद उन्हें कोई अधिकारी या कर्मचारी नहीं मिला। उनका आरोप है कि शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है और जिम्मेदार अधिकारी जनता की समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं हैं।
सत्यवान ने कहा, “जब भी मैं सीधी आकर कार्यालय पहुंचता हूं, यहां या तो ताला लगा मिलता है या फिर अधिकारी नहीं मिलते। आखिर अपनी समस्या लेकर मैं कहां जाऊं और किससे मिलूं, यह समझ नहीं आता।”
गुरुवार को भी कार्यालय में केवल एक चपरासी मौजूद मिला, जिसने अपना नाम बताने से इनकार कर दिया। जबकि कार्यालय में मुख्य रूप से कार्यपालन अधिकारी पी.के. त्रिपाठी, एसडीओ रविंद्र भालेकर सहित अन्य अधिकारियों की पदस्थापना है। इसके बावजूद कार्यालय में कोई जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित नहीं मिला।
मामले में पक्ष जानने के लिए कार्यपालन अधिकारी पी.के. त्रिपाठी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इससे कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवाल और गहरे हो गए हैं।
वहीं कार्यालय के आसपास मौजूद लोगों ने दावा किया कि कार्यपालन अधिकारी पी.के. त्रिपाठी नियमित रूप से कार्यालय में नहीं बैठते। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे महीने में कभी-कभार कुछ घंटों के लिए आते हैं और आवश्यक फाइलों पर हस्ताक्षर कर वापस चले जाते हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
लगातार शिकायतों और जनता की नाराजगी के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी कार्यालयों में अधिकारी ही उपलब्ध नहीं रहेंगे तो आम नागरिक अपनी समस्याओं का समाधान आखिर किससे करवाएंगे। महान परियोजना कार्यालय की यह स्थिति प्रशासनिक जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रही है।

