बारिश का आलम,उमस भरी गर्मी से बढ़ रही हैं बीमारियां
वायरल फीवर एवं पेट की बीमारियों का फैलाव ज्यादा
सीधी
जिले में मानसून की दस्तक के बाद बारिश का दौर रुक रुक कर शुरू है लेकिन ज्यादा बारिश न होने के कारण कई दिनों से उमस भरी गर्मी का भारी प्रकोप बना हुआ है हालांकि कल शुक्रवार की शाम फिर बारिश हुई है लेकिन उमस अभी भी बरकरार है। उमस भरी गर्मी से राहत पाने के लिए लोग कूलर, पंखे, एससी का उपयोग भी करने को मजबूर हैं।
वर्तमान में ऐसे हालात बने हुए हैं कि यदि थोड़ी सी भी लापरवाही हुई तो सरद गरम की चपेट में लोग आसानी से आ जाते हैं। इसी के चलते काफी संख्या में लोग वायरल फीवर की चपेट में आकर डॉक्टरों के पास इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं। वर्तमान में सबसे ज्यादा वायरल फीवर एवं पेट की बीमारियों से पीडित होकर लोग उपचार कराने के लिए डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं।
क्या कहते हैं डॉक्टर
चर्चा के दौरान कुछ डॉक्टरों ने बताया कि वर्तमान में इस तरह का मौसम बना हुआ है कि थोड़ी सी लापरवाही भी लोगों को भारी पड़ सकती है। सर्दी एवं गर्मी का असर भी बना हुआ है। जिसके चलते लोग वायरल फीवर की चपेट में आ रहे हैं। खान-पान को लेकर भी इन दिनों काफी सावधान रहने की जरूरत है।
बासी एवं प्रदूषित खाद्य सामग्री का उपयोग करना काफी भारी पड़ सकता है। वर्तमान में बने वातावरण के चलते लोगों को कम मात्रा में भोजन करना चाहिए तथा ताजा भोजन ही उपयोग में लेना चाहिए। बचा हुआ भोजन कुछ घंटे के अंदर ही प्रदूषित हो जाता है और उसका उपयोग करने में फूड प्वाइजनिंग की समस्या बढ़ जाती है।
इस तरह की सावधानी बरतने की अपील स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार लोगों से की जा रही है कि वर्तमान में प्रदूषित एवं बासी भोजन का उपयोग कतई न करें। देखा यह जा रहा है कि पेट की बीमारियों से संबंधित जो भी मरीज आ रहे हैं उनमें फूड प्वाइजनिंग के लक्षण ज्यादा पाए जा रहे हैं।
झोलाछाप डॉक्टरों की कट रही चांदी
सीधी जिले भर में मौसमी बीमारियों का प्रकोप बरपने से झोलाछाप डॉक्टरों की चांदी सबसे ज्यादा कट रही है। झोलाछाप डॉक्टरों के यहां मरीजों की भीड़ सुबह से लेकर देर शाम तक उमड़ रही है। ये अवश्य है कि अधिकांश झोलाछाप डॉक्टर मरीजों का उपचार करने के साथ ही उनसे ज्यादा से ज्यादा वसूली कर रहे हैं। उनके द्वारा वायरल फीवर से पीडित मरीजों की जांच के नाम पर ही हजारों रूपए ऐंठे जा रहे हैं।
इसके अलावा वाटल एवं इंजेक्शन लगाने पर भी उनका बिल एक हजार रूपए से ज्यादा का बन जाता है। कुल मिलाकर वर्तमान में मरीजों की संख्या काफी ज्यादा बढऩे से झोलाछाप डॉक्टरों की दुकान मरीजों की भीड़ से पूरी तरह से गुलजार है।
झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा मरीजों को अपने यहां भर्ती करने की व्यवस्था भी बनाई गई है जिससे कुछ घंटे भर्ती करके इंजेक्शन एवं वाटल लगाने के बाद लम्बा चौड़ा बिल वसूला जा सके। झोलाछाप डॉक्टरों के गलत उपचार के चलते कुछ मरीजों की हालत सुधरने के वजाय और भी ज्यादा बिगड़ जाती है। जिसके बाद वह अपना उपचार कराने के लिए अन्य स्थानों में भटकने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

