पंचायतों में वेंडरों के भुगतान पर नहीं हो रही टीडीएस कटौती
पंचायत राज के आदेश बेअसर, जीएसटी व टीडीएस नियमों की अनदेखी से राजस्व को नुकसान
सीधी:- मध्यप्रदेश पंचायत राज संचालनालय द्वारा 23 जुलाई को सभी जिला पंचायतों और जनपद पंचायतों को पत्र जारी कर पंचायत दर्पण पोर्टल पर पंजीकृत वेंडरों के भुगतान के समय नियमानुसार 2 प्रतिशत टीडीएस कटौती और जीएसटी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि सभी वेंडरों का सही श्रेणी में पंजीयन किया जाए तथा भुगतान के समय नियमानुसार जीएसटी काटकर जमा किया जाए। इसके बावजूद जिले की लगभग सभी ग्राम पंचायतों में अभी भी वेंडरों के भुगतान पर टीडीएस की कटौती नहीं की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार कई पंचायतों में लाखों रुपये के भुगतान बिना टीडीएस काटे किए जा रहे हैं, जिससे शासन के निर्देशों की अवहेलना होने के साथ-साथ राजस्व हानि की आशंका भी जताई जा रही है। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब पंचायत राज संचालनालय ने स्पष्ट आदेश जारी कर दिए हैं, तो जिले में इनका पालन क्यों नहीं हो रहा। क्या संबंधित अधिकारियों द्वारा निगरानी नहीं की जा रही या फिर नियमों की जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।
*एक साल पहले भी जारी हो चुका पत्र*
इसके पहले भी भोपाल स्थित पंचायत राज संचालनालय ने 23 अक्टूबर 2025 को जारी पत्र में सभी कलेक्टरों और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विकास कार्यों में सामग्री एवं सेवाओं के लिए किए जाने वाले भुगतान पर जीएसटी नियमों के अनुसार टीडीएस की अनिवार्य कटौती की जाए।
पत्र में यह भी कहा गया है कि नियमों का पालन नहीं होने से शासन को राजस्व हानि हो सकती है और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। इसके बावजूद जिले की कई ग्राम पंचायतों में वेंडरों के भुगतान के समय टीडीएस की कटौती नहीं किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। यदि यह सही पाया जाता है, तो यह शासन के स्पष्ट निर्देशों की अनदेखी माना जाएगा।
पत्र में पंचायतों को जीएसटी में पंजीयन, वेंडरों का जीएसटीएन पोर्टल पर दर्ज करने, जीएसटी युक्त बिल लेने तथा नियमानुसार जीएसटी अथवा आईजीएसटी के अनुसार टीडीएस काटने के निर्देश दिए गए हैं। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि बिल में टैक्स अलग से न दिखाया गया हो, तब भी नियमानुसार टीडीएस काटा जाना चाहिए। इस तरीके से लगातार पत्र पर पत्र जारी हो रहे है बावजूद टीडीएस कटौती नहीं हो रही है।

