झोलाछाप डॉक्टरों का जाल, लोगों की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़
जिन्हें कार्रवाई करना उनके हाथ बंधे, अधिकारी न ध्यान दे रहे न हो रही कार्रवाई, गलत उपचार से जा रही जान
सीधी:- जिले के ग्रामीण अंचलों में झोलाछाप डॉक्टरों का नेटवर्क लगातार फैलता जा रहा है। गांव-गांव बिना मान्यता और आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता के झोलाछाप धड़ल्ले से मरीजों का ईलाज कर रहे हैं। इससे लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और तत्काल ईलाज की मजबूरी का फायदा उठाकर ये तथाकथित डॉक्टर खुलेआम क्लीनिक संचालित कर रहे हैं।
कई मामलों में गलत दवा, गलत इंजेक्शन और गलत उपचार के कारण मरीजों की हालत गंभीर होने के साथ मौत तक होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ग्रामीणो का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ जांच व कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता करता है। जब तक कोई बड़ी शिकायत या मौत जैसी घटना सामने नहीं आती, तब तक अवैध क्लीनिकों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती। इससे झोलाछाप डॉक्टरों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं।
लोगों का कहना है कि यदि समय-समय पर नियमित जांच अभियान चलाकर ऐसे क्लीनिकों को बंद किया जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती है। जगह-जगह झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा किए जा रहे उपचार से स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह भी आरोप लगाए जा रहे कि हर माह मिलने वाली चढ़ोत्री के कारण कार्रवाई नहीं की जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जिलेभर में विशेष अभियान चलाकर अवैध चिकित्सकों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
*स्वास्थ्य केन्द्रों में बेहतर व्यवस्थाएं होना जरूरी:-*
ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त व्यवस्थाएं न होने, डॉक्टरों की कमी, दवाओं का अभाव और उपचार न मिलने के कारण लोग मजबूरी में झोलाछाप डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं।कई गांवो में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं सीमित होने से मरीजों को तत्काल ईलाज के लिए अवैध क्लीनिकों का सहारा लेना पड़ता है।समाजसेवियों का मानना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्र मे बेहतर अस्पतालों मे पर्याप्त डॉक्टर,दवाएं और जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए,तो झोलाछाप डॉक्टरो पर लोगों की निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है।
*खुलेआम चल रहे क्लीनिक:-*
जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में बिना पंजीकरण और बिना चिकित्सकीय डिग्री के लोग क्लीनिक संचालित कर रहे हैं। इन क्लीनिकों में मरीजों को ग्लूकोज चढाना, इंजेक्शन लगाना और गंभीर बीमारियों का ईलाज तक किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद स्थायी कार्रवाई नहीं होती, जिससे कुछ दिनों बाद फिर वही गतिविधियां शुरू हो जाती हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नियमित निरीक्षण कर ऐसे अवैध क्लीनिकों को सील किया जाए और संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
*लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे ग्रामीण:-*
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बिना मान्यता और चिकित्सकीय योग्यता के लोग खुलेआम क्लीनिक संचालित कर मरीजों का ईलाज कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार शिकायत मिलने पर भी प्रभावी कार्रवाई नहीं करते और कई बार कार्रवाई से पहले ही सूचना लीक होने से अवैध क्लीनिक संचालक सबूत हटा देते हैं। यदि कार्रवाई होती भी है तो कुछ दिनों बाद क्लीनिक दोबारा शुरू हो जाते हैं। ग्रामीणों ने जिलेभर में विशेष अभियान चलाकर अवैध चिकित्सकों पर सख्त कार्रवाई, नियमित निरीक्षण और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की मांग की है, ताकि झोलाछाप डॉक्टरों के गोरखधंधे पर लगाम लग सके।

