तहसीलदार पर ₹50 हजार नहीं दिए तो गलत प्रतिवेदन देने का आरोप

तहसीलदार पर ₹50 हजार नहीं दिए तो गलत प्रतिवेदन देने का आरोप, FIR के बाद कलेक्टर के पास पहुंचा 64 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक, तहसीलदार का गवाह पलटा

मध्यप्रदेश के सीधी जिले के चुरहट तहसीलदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए 64 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक संतमुनि शर्मा ने जिला कलेक्टर विकास मिश्रा को आवेदन देकर अपने विरुद्ध दर्ज एफआईआर की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संतमुनि शर्मा का आरोप है कि भूमि के खसरा रिकॉर्ड में नाम सुधार के मामले में सही प्रतिवेदन भेजने के एवज में उनसे कथित तौर पर ₹50 हजार की मांग की गई। जहा राशि देने में असमर्थता जताने के बाद गलत प्रतिवेदन भेजे जाने का आरोप उन्होंने लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

वही ग्राम टकटैया निवासी संतमुनि शर्मा शासकीय माध्यमिक विद्यालय सांड़ा के प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत्त हैं। जहा उन्होंने बताया कि ग्राम सर्रा स्थित उनकी भूमि आराजी क्रमांक 792 एवं 793/1 में नाम दो बार दर्ज हो गया था। किसान आईडी में भूमि की प्रविष्टि नहीं होने पर उन्होंने नाम सुधार के लिए एसडीएम न्यायालय चुरहट में आवेदन दिया था। जहा तहसीलदार कार्यालय से हल्का पटवारी की जांच कराई गई और पटवारी ने 22 जून 2026 को प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

संतमुनि शर्मा का आरोप है कि इसके बाद वे कई बार तहसीलदार से एसडीएम न्यायालय को प्रतिवेदन भेजने का अनुरोध करते रहे। इसी दौरान उनसे कथित तौर पर ₹50 हजार की मांग की गई। यह राशि देने से इनकार करने के बाद 24 जून को तैयार प्रतिवेदन में ग्राम सर्रा की जगह ग्राम पड़खुरी लिख दिया गया। शर्मा का दावा है कि यह प्रतिवेदन करीब दो महीने तक रोके रखने के बाद 24 अगस्त को एसडीएम न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

इस विवाद बढ़ने के बाद 27 अगस्त को चुरहट थाने में एफआईआर क्रमांक 0487/2026 दर्ज हुई, जिसमें BNS की विभिन्न धाराओं के साथ एससी-एसटी अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं। वही शर्मा ने एफआईआर में दर्ज घटना के समय और रिपोर्ट दर्ज किए जाने के समय पर भी सवाल उठाते हुए तहसील कार्यालय की CCTV फुटेज तथा जावक पंजी की जांच की मांग की है।

तहसीलदार के गवाह के बयान से बढ़ा मामला

इस मामले में अब उस व्यक्ति के बयान ने भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसे घटनास्थल पर मौजूद बताया जा रहा है और जिसे तहसीलदार की ओर से गवाह के रूप में रखा गया था। गवाह आशीष सिंह ने बताया कि उनके सामने संतमुनि शर्मा ने कोई गलत या जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया। जहा उनके अनुसार शर्मा केवल ऊंची आवाज में बात कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि उनके सामने शर्मा ने न तो जान से मारने की धमकी दी और न ही किसी प्रकार का दुर्व्यवहार किया।

अब इस बयान के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है और अब शिकायतकर्ता पक्ष इसे एफआईआर में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए महत्वपूर्ण तथ्य बता रहा है।

इस मामले मे एसडीएम चुरहट अजय शर्मा ने कहा कि मामले का संज्ञान लिया गया है और जांच की जा रही है। वही यदि तहसीलदार या किसी अन्य अधिकारी की ओर से कोई त्रुटि सामने आती है तो उसे सुधारने का प्रयास किया जाएगा। जहा अब कलेक्टर के समक्ष दिए गए आवेदन के बाद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और एफआईआर में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता सामने आने का इंतजार है।

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