सिंगरौली में रिश्तों का कत्ल: पत्नी की मौत के बाद बहन संग फरार हुआ पति, 9 दिन में उजागर हुई खौफनाक साजिश
सिंगरौली (मध्य प्रदेश)।
मोरवा थाना क्षेत्र के ग्राम करैला में विवाहिता शबनम वर्मा की मौत अब महज़ एक पारिवारिक त्रासदी नहीं रह गई है, बल्कि यह मामला रिश्तों की मर्यादा, कानून की निष्क्रियता और एक सुनियोजित अपराध की भयावह तस्वीर पेश कर रहा है। घटना के 9 दिन बाद मृतका का पति अरविंद कश्यप, शबनम की छोटी बहन सोनल वर्मा के साथ फरार हो गया, जिसने पूरे मामले को आत्महत्या से उठाकर सीधे हत्या और षड्यंत्र की आशंका के घेरे में ला खड़ा किया है।
परिजनों का आरोप है कि शबनम वर्मा की शादी के दौरान ही पति अरविंद कश्यप और छोटी बहन सोनल वर्मा के बीच नाजायज़ संबंध स्थापित हो चुके थे। परिवार का दावा है कि इसी अवैध रिश्ते के चलते शबनम को लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही थी। आरोप यह भी लगाया गया है कि सोनल ने अरविंद से शबनम को रास्ते से हटाने की बात कही थी, ताकि दोनों खुलकर साथ रह सकें।
परिजनों के अनुसार, इसी आपराधिक साजिश के तहत शबनम की रात में हत्या की गई और फिर घटना को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को फांसी पर लटका दिया गया। मृतका के शरीर पर मिले संदिग्ध चोट के निशान और घटनास्थल की परिस्थितियां आत्महत्या की कहानी से मेल नहीं खातीं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि घटना के ठीक 9वें दिन आरोपी पति मृतका की बहन के साथ घर छोड़कर फरार हो गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने गंभीर आरोपों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के बावजूद मोरवा पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में है। आरोप है कि आरोपी लंबे समय तक क्षेत्र में खुलेआम घूमते रहे, लेकिन न तो उन्हें हिरासत में लिया गया और न ही हत्या जैसी गंभीर धाराओं में तत्काल मामला दर्ज किया गया।
कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि किसी सूचना से संज्ञेय अपराध का संकेत मिलता है, तो एफआईआर दर्ज करना पुलिस की बाध्यता है। इसके बावजूद इस मामले में देरी ने संदेह को और गहरा कर दिया है।
अब यह मामला केवल शबनम वर्मा की मौत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पुलिस की कार्यप्रणाली, कानून के पालन और महिला सुरक्षा की गंभीर परीक्षा बन चुका है। पीड़ित परिवार और ग्रामीणों की मांग है कि आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो, निष्पक्ष जांच कराई जाए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि न्याय केवल शब्द न रह जाए, बल्कि पीड़ित को वास्तव
