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Rewa में सहेजी गई अनमोल निशानी, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का चश्मा आज भी सुरक्षित

Manoj Shukla

By Manoj Shukla

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Rewa में सहेजी गई अनमोल निशानी, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का चश्मा आज भी सुरक्षित

Rewa: राजनीति की दुनिया में नेताओं से जुड़े कई किस्से लोगों के दिलों में हमेशा ज़िंदा रहते हैं। ऐसा ही एक अनोखा किस्सा जुड़ा है मध्यप्रदेश के रीवा शहर से, जहां पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एक निशानी आज भी बड़े जतन से संभालकर रखी गई है। यह कोई साधारण वस्तु नहीं, बल्कि उनका चश्मा है, जिसे एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने करीब 34 साल पहले चुनावी दौरे के दौरान उनसे स्मृति के रूप में प्राप्त किया था।

Rewa : दरअसल, वर्ष 1991 के चुनावी अभियान के दौरान जब राजीव गांधी रीवा पहुंचे थे, तब एक कार्यकर्ता ने उनसे गिफ्ट की मांग की। राजीव गांधी ने उस आत्मीय आग्रह को स्वीकार करते हुए मुस्कराकर अपना चश्मा उतारकर उन्हें सौंप दिया। यह छोटा-सा पल उस कार्यकर्ता के लिए जीवनभर की स्मृति बन गया।

तब से लेकर आज तक वह चश्मा सुरक्षित है। इसे किसी आम स्थान पर नहीं, बल्कि बैंक लॉकर में रखा गया है ताकि यह समय और परिस्थितियों से सुरक्षित रहे। कार्यकर्ता का कहना है कि यह चश्मा सिर्फ एक वस्तु नहीं, बल्कि उनके नेता के साथ जुड़ी भावनाओं और विश्वास का प्रतीक है। यही कारण है कि इसे घर की अलमारी में नहीं, बल्कि बैंक लॉकर में सहेजकर रखा गया है।

इस घटना की चर्चा आज भी रीवा के राजनीतिक गलियारों और आम लोगों के बीच होती रहती है। जो भी इसके बारे में जानता है, वह यह महसूस करता है कि किस तरह एक साधारण-सा चश्मा एक ऐतिहासिक धरोहर का रूप ले सकता है। राजनीति में बड़ी-बड़ी इमारतें, मूर्तियां या स्मारक तो बनते हैं, लेकिन ऐसे छोटे-छोटे प्रतीक कई बार इतिहास को और ज्यादा जीवंत बना देते हैं।

राजीव गांधी की सादगी और सहज स्वभाव का यह किस्सा कार्यकर्ताओं के दिलों में आज भी ताजा है। चश्मे को संजोकर रखना केवल एक स्मृति नहीं, बल्कि उस दौर का प्रमाण है, जब नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच आत्मीय रिश्ते हुआ करते थे।

आज यह चश्मा रीवा की पहचान और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए गर्व का प्रतीक बन चुका है। आने वाली पीढ़ियों के लिए यह सिर्फ एक चश्मा नहीं, बल्कि विश्वास, आत्मीयता और इतिहास का ऐसा दस्तावेज़ है, जो हमेशा याद दिलाएगा कि राजनीति सिर्फ सत्ता का खेल नहीं, बल्कि रिश्तों और यादों का भी हिस्सा होती है।

Manoj Shukla

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मै मनोज कुमार शुक्ला 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है।

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