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बैगा परिवारों की वंटन भूमि पर कब्जे के आरोपों में घिरे शिक्षक को नोटिस, 13 मार्च को होगी सुनवाई

Manoj Shukla

By Manoj Shukla

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बैगा परिवारों की वंटन भूमि पर कब्जे के आरोपों में घिरे शिक्षक को नोटिस, 13 मार्च को होगी सुनवाई

एमपी के सिंगरौली जिले में आदिवासी भूमि से जुड़ा एक संवेदनशील मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सरई तहसील अंतर्गत ग्राम बंजारी में बैगा परिवारों की वंटन (शासकीय पट्टेदार) भूमि पर कथित अतिक्रमण के आरोपों के बीच प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए एक शिक्षक समेत अनावेदकों को नोटिस जारी किया है। तहसीलदार न्यायालय सरई ने सभी पक्षों को 13 मार्च 2026 को उपस्थित होकर जवाब और साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

वही विवाद का केंद्र आराजी क्रमांक 3201/3041, रकवा 1.43 हेक्टेयर भूमि है, जो अभिलेखों में सुखरनिया बैगा, छोटी बाई और रन्नु बैगा के नाम दर्ज बताई जा रही है। आवेदक पक्ष का आरोप है कि उक्त भूमि उनके अभिभावक को वंटन में प्राप्त हुई थी और इसका क्रय-विक्रय कानूनन प्रतिबंधित है। आरोपों के घेरे में आए सुरेंद्र कुमार टांडिया पर दावा किया गया है कि उन्होंने बैगा परिवारों की भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण कार्य शुरू कराया।

जहा स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि संबंधित भूमि पर लगभग दस कमरों का मकान निर्माणाधीन है। आवेदकों का कहना है कि अनपढ़ बैगा परिवारों से कथित रूप से कागजों पर हस्ताक्षर कराकर जमीन पर नियंत्रण स्थापित किया गया। हालांकि, इन आरोपों पर अनावेदक पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया अब तक सामने नहीं आई है।

इस मामले की गंभीरता इस वजह से भी बढ़ गई है क्योंकि पूर्व में उपखंड अधिकारी देवसर द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया था कि बैगा जनजाति की वंटन भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण स्वीकार्य नहीं है और अवैध कब्जा पाए जाने पर ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई संभव है।

जहा बैगा समाज से जुड़े प्रतिनिधि विजय बहादुर बैगा ने घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि प्रभावशाली और शिक्षित वर्ग पर ऐसे आरोप लगते हैं तो यह आदिवासी अधिकारों के लिए गंभीर चुनौती है। उन्होंने निष्पक्ष जांच और त्वरित न्याय की मांग की।

वही इस नोटिस में चेतावनी दी गई है कि निर्धारित तिथि पर अनुपस्थित रहने या संतोषजनक जवाब न देने की स्थिति में एकपक्षीय कार्रवाई के साथ अर्थदंड भी लगाया जा सकता है। अब सबकी निगाहें 13 मार्च की सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितना दम है और प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।

Manoj Shukla

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मै मनोज कुमार शुक्ला 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है।

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