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स्वच्छ ऊर्जा से आसमान में इतिहास,Solar Impulse-2 ने बदली उड्डयन की परिभाषा

Manoj Shukla

By Manoj Shukla

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स्वच्छ ऊर्जा से आसमान में इतिहास,Solar Impulse-2 ने बदली उड्डयन की परिभाषा

सौर ऊर्जा से चलने वाला दुनिया का पहला विमान ‘सोलर इम्पल्स-2’ (Solar Impulse-2) आधुनिक विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ। 9 मार्च 2015 को अबू धाबी से उड़ान भरने वाला यह विमान बिना एक भी बूंद ईंधन के केवल सूरज की रोशनी पर निर्भर रहते हुए 17 चरणों में 40,000 किलोमीटर से अधिक उड़ान भरकर 26 जुलाई 2016 को फिर अबू धाबी पहुंचा। यह सफर लगभग 505 दिनों तक चला और चार महाद्वीपों के ऊपर से गुज़रा।

Solar Impulse-2 अनोखे विमान को स्विस अन्वेषक डॉ. बर्ट्रेंड पिकार्ड और इंजीनियर आंद्रे बोर्शबर्ग ने विकसित किया। दोनों ने बारी-बारी से पायलटिंग की और दुनिया को यह दिखाने का साहसिक प्रयास किया कि भविष्य का आसमान स्वच्छ, प्रदूषण-रहित और ऊर्जा-सक्षम हो सकता है। इस परियोजना को बनाने और परीक्षणों में लगभग 17 वर्ष लगे, जिसमें इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और 90 से अधिक विशेषज्ञों की टीम ने योगदान दिया।

क्यों बनाया गया सोलर इम्पल्स-2?

परंपरागत उड्डयन उद्योग में जीवाश्म ईंधन की खपत और कार्बन उत्सर्जन तेजी से बढ़ रहा था। ऐसे में यह परियोजना इस संदेश के साथ शुरू हुई कि स्वच्छ तकनीक केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं, बल्कि व्यवहारिक दुनिया में भी कारगर हो सकती है। सोलर इम्पल्स-2 को विकसित करने का मुख्य उद्देश्य था

✅ स्वच्छ ऊर्जा आधारित एविएशन का संभावित भविष्य दिखाना

✅ दुनिया को यह विश्वास दिलाना कि नवीकरणीय ऊर्जा जटिल मिशनों को भी सफल बना सकती है

✅ युवा वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं को ग्रीन टेक्नोलॉजी अपनाने के लिए प्रेरित करना

तकनीक और लागत

सोलर इम्पल्स-2 के 72-मीटर लंबे पंखों पर 17,000 सोलर सेल लगाए गए थे, जो दिन में ऊर्जा संग्रहित कर चार लिथियम-आयन बैटरियों में स्टोर करते थे, जिससे विमान रात में भी उड़ पाता था। इसका वजन मात्र 2.3 टन था, जो एक कार्गो वैन के बराबर है, लेकिन इसके पंख बोइंग 747 से भी लंबे थे। परियोजना पर कुल 20 करोड़ डॉलर (लगभग 1,600 करोड़ रुपये) की लागत आई, जिसमें शोध, निर्माण, परीक्षण और विश्व यात्रा अभियान शामिल थी।

भविष्य की संभावनाएं

सोलर इम्पल्स-2 ने साबित कर दिया कि आने वाले वर्षों में बिना ईंधन वाले विमानों, ड्रोन और ग्रीन एविएशन तकनीक का विकास संभव है। यह मिशन दुनिया भर में कार्बन-फ्री उड़ान तकनीक, हल्के सौर विमान, हाई-एल्टीट्यूड कम्युनिकेशन ड्रोन और ई-एविएशन के क्षेत्र में नए अध्याय खोल रहा है।

Manoj Shukla

Manoj Shukla

मै मनोज कुमार शुक्ला 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है।

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