CWC सदस्य एवं पूर्व मंत्री (मध्य प्रदेश शासन) श्री कमलेश्वर पटेल का वक्तव्य
राम मंदिर चंदा चोरी
आस्था के नाम पर राजनीति, चढ़ावे के नाम पर लूट
भगवान श्रीराम के नाम पर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा, विश्वास और मेहनत की कमाई का दान दिया। लेकिन आज वही चंदा और चढ़ावा गंभीर सवालों के घेरे में है। यह केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों रामभक्तों की आस्था के साथ किया गया विश्वासघात है।
भाजपा, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और संघ परिवार ने लगभग तीन दशकों तक भगवान श्रीराम के नाम पर राजनीति की, जनता से चंदा एकत्र किया और उसी आंदोलन के आधार पर सत्ता प्राप्त की। आज देश यह जानना चाहता है कि भगवान श्रीराम के नाम पर जुटाया गया धन आखिर किसके संरक्षण में कथित रूप से लूटा गया।
तीन बड़े सवाल
जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ, तो इस पूरे प्रकरण की जवाबदेही कौन लेगा?
यदि सब कुछ पारदर्शी और सही था, तो चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे क्यों हुए?
यदि कोई अनियमितता नहीं हुई, तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच से डर किस बात का है?
अब तक सामने आए गंभीर तथ्य
• श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जा चुके हैं। यह स्वयं संकेत देता है कि मामला सामान्य प्रशासनिक त्रुटि का नहीं, बल्कि गंभीर अनियमितताओं का है।
• ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने स्वयं सार्वजनिक बयान दिए हैं, जबकि ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता और संपत्तियों की सुरक्षा की सर्वोच्च जिम्मेदारी उन्हीं पर थी।
• मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रस्ट के विशिष्ट आमंत्रित सदस्य गोपाल राव (गोपाल नगरकोटे) को हटाए जाने और उनकी स्थिति को लेकर गंभीर विरोधाभास सामने आए हैं।
• आरएसएस के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी कृष्णमोहन को ट्रस्ट का नया महासचिव बनाया गया है, जबकि उन पर पूरे मामले को दबाने और लीपापोती करने के आरोप सार्वजनिक रूप से लगाए जा चुके हैं।
• यह सर्वविदित है कि ट्रस्ट की प्रशासनिक संरचना और शीर्ष नियुक्तियों में प्रधानमंत्री कार्यालय की सक्रिय भूमिका रही है। ऐसे में केंद्र सरकार अपनी जवाबदेही से स्वयं को अलग नहीं कर सकती।
• एसआईटी अब राम मंदिर के बड़े आयोजनों के खर्चों की भी जांच कर रही है।
• 22 जनवरी 2024 की प्राण प्रतिष्ठा पर लगभग ₹113 करोड़ खर्च किए गए, जिसमें लगभग 8,000 अतिथि शामिल हुए।
• 25 नवंबर 2025 के ध्वजारोहण कार्यक्रम पर लगभग ₹10.12 करोड़ खर्च किए गए।
• फर्जी रसीदों, नकद चढ़ावे, लेखा जोखा और कथित वित्तीय हेराफेरी से जुड़े अनेक आरोप सामने आए हैं।
• छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की जवाबदेही अब तक तय नहीं हुई है।
• उत्तराखंड के श्री बद्रीनाथ मंदिर से जुड़े हालिया दान घोटाले ने भी मंदिरों के चढ़ावे और दान की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।
देश जानना चाहता है
• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे प्रकरण पर मौन क्यों हैं?
• क्या चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोविंद देव गिरी, गोपाल राव तथा ट्रस्ट के अन्य शीर्ष पदाधिकारी अपनी जवाबदेही से बच सकते हैं?
• जब पूरा ट्रस्ट सवालों के घेरे में है, तो कार्रवाई केवल छोटे कर्मचारियों तक ही सीमित क्यों है?
• क्या डबल इंजन सरकार दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है?
• क्या केंद्र सरकार सच्चाई सामने आने से डर रही है?
• यदि सब कुछ पारदर्शी था, तो इस्तीफे क्यों हुए?
• शीर्ष स्तर पर अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
स्पष्ट तथ्य
कोई भी प्रेस कॉन्फ्रेंस इस सच्चाई पर पर्दा नहीं डाल सकती कि सीसीटीवी निगरानी, बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था और प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के बिना इतने बड़े स्तर पर यह कथित घोटाला संभव नहीं हो सकता।
टुकड़ों में इस्तीफे, छोटे कर्मचारियों की गिरफ्तारी और सीमित कार्रवाई केवल लीपापोती का प्रयास प्रतीत होती है, ताकि बड़ी मछलियों तक आंच न पहुंचे।
कांग्रेस पार्टी की मांगें
1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सामने जवाब दें
प्रधानमंत्री स्पष्ट करें कि ट्रस्ट के गठन, शीर्ष नियुक्तियों और प्रशासनिक निगरानी में उनकी सरकार तथा प्रधानमंत्री कार्यालय की क्या भूमिका रही और इतने गंभीर आरोपों के बाद वे अब तक मौन क्यों हैं।
2. तत्काल एफआईआर और गिरफ्तारी
चंपत राय, अनिल मिश्रा तथा इस पूरे प्रकरण में शामिल सभी प्रभावशाली व्यक्तियों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की जाए।
3. सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक जांच
पूरे प्रकरण की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस कथित लूट के पीछे कौन लोग हैं और किसके संरक्षण में यह सब वर्षों तक चलता रहा।
4. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल भंग किया जाए
वर्तमान ट्रस्ट को भंग कर धर्माचार्यों, प्रतिष्ठित नागरिकों, प्रशासनिक विशेषज्ञों तथा स्वतंत्र सदस्यों के साथ एक नया, पारदर्शी और जवाबदेह ट्रस्ट गठित किया जाए।
5. चढ़ावे और चंदे का पूर्ण फॉरेंसिक ऑडिट
राम मंदिर के लिए प्राप्त समस्त चंदे, चढ़ावे, भूमि खरीद, आयोजनों और व्ययों का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए तथा उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
निष्कर्ष
भगवान श्रीराम किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं। वे करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और नैतिक चेतना के प्रतीक हैं।
भगवान श्रीराम के नाम पर जुटाए गए धन की कथित लूट और उस पर पर्दा डालने की हर कोशिश देश की धार्मिक चेतना का अपमान है।
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की आस्था पर डाका डालने वालों को बचाने की नहीं, बल्कि उन्हें बेनकाब कर कानून के कठघरे में खड़ा करने की आवश्यकता है।
कार्यालय
कमलेश्वर पटेल
CWC सदस्य एवं पूर्व मंत्री (मध्य प्रदेश शासन)

