धमकियों के साये में इंसाफ,विधवा से दुष्कर्म, तस्वीरें वायरल कर ब्लैकमेल और सिस्टम मौन
मध्य प्रदेश के सीधी जिले के कोतवाली थाना क्षेत्रांतर्गत से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो सिर्फ अपराध नहीं बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता की भी कहानी कहता है। शिकायतकर्ता विधवा महिला के अनुसार, आरोपी अशोक तिवारी, पिता लालबिहारी तिवारी, निवासी पटेहरा सोन तीर ने उसके नौनिहाल बच्चों को जान से मारने की धमकी देकर न केवल दुष्कर्म किया, बल्कि वर्षों तक भय और ब्लैकमेल का जाल बुनता रहा।
आरोप है कि आरोपी ने चोरी-छिपे आपत्तिजनक तस्वीरें व वीडियो लेकर महिला को सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी दी और जब शिकायतकर्ता विधवा महिला नहीं झुकी, तो कथित तौर पर गांव के ग्राम पंचायत के व्हाट्सएप ग्रुप से लेकर फेसबुक स्टोरी तक “इंसाफ” का नया डिजिटल मॉडल पेश कर दिया। अर्थात् आपत्तिजनक तस्वीरें व वीडियो वायरल कर दिया।सवाल यह है कि क्या अब न्याय भी वायरल होकर ही मिलेगा?
शिकायतकर्ता विधवा महिला का कहना है कि लगभग 6 माह से अधिक समय से कोतवाली थाने में शिकायत, एसपी कार्यालय में आवेदन, जनसुनवाई में गुहार सब कुछ किया, लेकिन कार्रवाई का पहिया शायद छुट्टी पर है। उल्टा, आरोपी और उसका भाई जितेंद्र तिवारी घर में घुसकर मारपीट और शिकायत वापस लेने की धमकियां देते रहे। मदद के लिए 112 पर कॉल करें तो जवाब मिलता है “आपके कहने से किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता”, और गाड़ी का इंतजार करते-करते दिन से रात हो जाती है।
मामले में नया मोड़ तब आता है जब आरोपी को फरार कराने में उसके जीजा रामाश्रय मिश्रा, निवासी ग्राम गाड़ा, थाना कोतवाली सीधी का नाम सामने आता है, जो खुद शहडोल जिले में बस कंडक्टर है और वह भी शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने के लिए जान से मारने की धमकियों का सिलसिला जारी रखे हुए है।
अब पुलिस का वही पुराना बयान “जल्द गिरफ्तारी होगी, कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” सवाल सिर्फ इतना है यह “जल्द” आखिर किस कैलेंडर में आता है?
हालांकि यह एक जांच का विषय है और अब देखना यह है कि जांच में कितनी सत्यता है? और पुलिस द्वारा कब तक में आरोपियों पर वैधानिक कार्रवाई की जाती है?

