डॉक्टर बनने का सपना टूटा: परीक्षा केंद्र के बाहर फूट-फूटकर रोए पिता और बेटी
एक पिता की आंखों में वर्षों से पल रहा सपना कुछ ही मिनटों में बिखर गया। बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए जिसने अपनी पूरी ताकत, मेहनत और जमा-पूंजी लगा दी, वह परीक्षा केंद्र के बाहर बेबस खड़ा था। हाथ जोड़कर गुहार लगा रहा था कि उसकी बेटी को अंदर जाने दिया जाए, लेकिन नियमों के आगे उसकी एक न चली।
21 जून को आयोजित नीट यूजी री-एग्जाम के दौरान मध्य प्रदेश के विदिशा से सामने आई यह घटना लोगों को भावुक कर रही है। परीक्षा केंद्र के बाहर पिता और बेटी की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। दोनों को महसूस हो रहा था कि एक साल की मेहनत और संघर्ष उनके सामने बिखर रहा है।
दरअसल, मई में हुई नीट परीक्षा पेपर लीक और अन्य विवादों के कारण रद्द कर दी गई थी। इसके बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने दोबारा परीक्षा आयोजित करने का फैसला लिया। लाखों छात्र दोबारा परीक्षा देने पहुंचे, लेकिन कुछ अभ्यर्थियों के लिए यह दिन नई परेशानी लेकर आया।
बताया जा रहा है कि विदिशा की छात्रा निर्धारित समय से कुछ मिनट देर से परीक्षा केंद्र पहुंची। नियमों के अनुसार दोपहर 1:30 बजे के बाद प्रवेश बंद कर दिया गया था। छात्रा और उसके पिता लगातार अधिकारियों से अनुरोध करते रहे, लेकिन उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में पिता की बेबसी साफ दिखाई दे रही है। वह बार-बार अधिकारियों से बेटी का भविष्य बचाने की अपील करते नजर आते हैं। बेटी भी रोते हुए परीक्षा में शामिल होने की गुहार लगाती दिखाई देती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिता ने बेटी की पढ़ाई और कोचिंग के लिए अपनी आर्थिक क्षमता से कहीं ज्यादा संघर्ष किया था। परिवार ने कई त्याग किए ताकि बेटी अपने डॉक्टर बनने के सपने को पूरा कर सके। छात्रा ने भी लंबे समय तक कड़ी मेहनत की थी, लेकिन परीक्षा केंद्र का बंद गेट उसके सपनों के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन गया।
यह घटना एक बार फिर उन सख्त परीक्षा नियमों और विद्यार्थियों के मानसिक दबाव पर सवाल खड़े कर रही है, जिनका सामना प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र हर साल करते हैं।

