“रक्तदान से राष्ट्रसेवा तक: 77वें गणतंत्र दिवस पर डॉ. प्रशांत तिवारी का 10 वर्षों का संकल्प, मानवता के लिए बहता जज़्बा”
77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर सेवा, समर्पण और राष्ट्रनिर्माण की भावना को साकार करती एक प्रेरणादायी कहानी सामने आई है। ज़िला सीधी के मझौली एवं रामपुर नैकिन के पूर्व बीएमओ रहे डॉ. प्रशांत तिवारी पिछले लगातार 10 वर्षों से रक्तदान कर न केवल अनगिनत ज़िंदगियों को नई उम्मीद दे रहे हैं, बल्कि समाज में जागरूकता की एक मजबूत लहर भी पैदा कर रहे हैं।
डॉ. प्रशांत तिवारी का मानना है कि रक्तदान सबसे बड़ा दान है, क्योंकि यह सीधे किसी के जीवन को बचाता है। उन्होंने संकल्प लिया है कि जब तक जीवन रहेगा, तब तक हर अवसर पर रक्तदान करते रहेंगे। उनका यह संकल्प सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि बीते एक दशक से निरंतर कर्म में बदलता आ रहा है।
गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर उनका यह योगदान देशभक्ति का एक अनूठा रूप प्रस्तुत करता है—जहां राष्ट्रसेवा सिर्फ भाषणों में नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की नसों में बहते रक्त के रूप में दिखाई देती है। उनके प्रयासों से प्रेरित होकर कई युवा और आमजन भी आगे आकर रक्तदान को अपना नियमित कर्तव्य बना रहे हैं।
इस गरिमामयी अवसर पर रीवा से पधारे डॉ. राघवेंद्र तिवारी की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा और उद्देश्य को और अधिक सशक्त बनाया। उनकी मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि चिकित्सा जगत का हर जिम्मेदार व्यक्ति यदि समाज के लिए एक कदम आगे बढ़े, तो परिवर्तन निश्चित है।
डॉ. प्रशांत तिवारी की यह यात्रा हमें सिखाती है कि सेवा ही सच्ची देशभक्ति है। 77वें गणतंत्र दिवस पर उनका यह सतत प्रयास समाज को यह संदेश देता है कि राष्ट्रनिर्माण केवल नीतियों से नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों से होता है।
