---Advertisement---

MP में सामान्य वर्ग की अनदेखी! SC-ST और अल्पसंख्यकों के लिए अलग विभाग, पर सवर्णों के लिए सिर्फ नियम

राजू गुप्ता ।। State Head @NewsE7Live

By राजू गुप्ता ।। State Head @NewsE7Live

Published on:

---Advertisement---

MP में सामान्य वर्ग की अनदेखी! SC-ST और अल्पसंख्यकों के लिए अलग विभाग, पर सवर्णों के लिए सिर्फ नियम

MP मे यूजीसी (UGC) के नए नियमों को लेकर उपजा विवाद भले ही सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद कानूनी रूप से थमता दिख रहा हो, लेकिन इसने मध्य प्रदेश में सामान्य वर्ग की उपेक्षा के पुराने जख्मों को फिर से हरा कर दिया है। प्रदेश में एससी-एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों के लिए तो समर्पित विभाग और वित्त निगम सक्रिय हैं, लेकिन सामान्य वर्ग के कल्याण के लिए कोई प्रभावी तंत्र नजर नहीं आ रहा है। इसे लेकर अब समाज के विभिन्न हलकों में वर्ग भेद और विभाजन की लकीरें गहरी होने की चिंता जताई जा रही है।

विभागों और आयोगों के बीच सिमटा ‘समानता का अधिकार’

MP में संवैधानिक समानता के दावों के बीच प्रशासनिक ढांचा वर्गों में बंटा नजर आता है। अल्पसंख्यक समुदायों के सर्वांगीण विकास के लिए वर्ष 1991 से ही अलग विभाग काम कर रहा है। इसी तरह एससी-एसटी और ओबीसी वर्गों की समस्याओं और उनके आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पृथक विभाग व वित्त विकास निगम गठित हैं। इन वर्गों की शिकायतों की सुनवाई के लिए राज्य और केंद्र स्तर पर शक्तिशाली आयोग भी मौजूद हैं। इसके उलट, सामान्य वर्ग के लिए न तो कोई अलग विभाग है और न ही शिकायतों की सुनवाई के लिए कोई प्रभावी आयोग।

नाम का आयोग, काम शून्य

MP सरकार ने सामान्य वर्ग के हितों के संरक्षण के लिए ‘मध्य प्रदेश राज्य सामान्य निर्धन वर्ग कल्याण आयोग’ का गठन तो किया, लेकिन यह केवल कागजों तक सीमित रह गया है। स्थिति यह है कि आयोग में लंबे समय से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या किसी भी पदाधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई है। नेतृत्व के अभाव में सामान्य वर्ग के निर्धन लोगों की सुनवाई पूरी तरह ठप पड़ी है, जिससे इस वर्ग में सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा असंतोष है।

नाम का आयोग, काम शून्य

सरकार ने सामान्य वर्ग के हितों के संरक्षण के लिए ‘मध्य प्रदेश राज्य सामान्य निर्धन वर्ग कल्याण आयोग’ का गठन तो किया, लेकिन यह केवल कागजों तक सीमित रह गया है। स्थिति यह है कि आयोग में लंबे समय से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या किसी भी पदाधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई है। नेतृत्व के अभाव में सामान्य वर्ग के निर्धन लोगों की सुनवाई पूरी तरह ठप पड़ी है, जिससे इस वर्ग में सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा असंतोष है।

बजट की कमी से ‘मेधावी विद्यार्थी योजना’ पर संकट

आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए ‘मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना’ एक बड़ा सहारा थी। इसके माध्यम से मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे महंगे कोर्सेज की फीस सरकार भरती थी। लेकिन अब बजट की कमी के चलते यह योजना भी बुरी तरह प्रभावित हो गई है। ऐसे में सामान्य वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों के सामने उच्च शिक्षा का संकट खड़ा हो गया है, जबकि अन्य आरक्षित वर्गों के लिए विशेष वित्तीय सहायता और छात्रवृत्तियां पूर्ववत जारी हैं।

राजू गुप्ता ।। State Head @NewsE7Live

राजू गुप्ता ।। State Head @NewsE7Live

राजू गुप्ता मध्य प्रदेश के सीधी जिले के एक सक्रिय और ज़मीनी पत्रकार हैं। वे लंबे समय से स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों पर तथ्यात्मक एवं निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते आ रहे हैं।

---Advertisement---
यह भी पढ़ें “हर बूंद की कीमत समझो” कर्म प्रथम चैरिटेबल का जल संरक्षण अभियान बना जनआंदोलन 
“हर बूंद की कीमत समझो” कर्म प्रथम चैरिटेबल का जल संरक्षण अभियान बना जनआंदोलन 

“हर बूंद की कीमत समझो” कर्म प्रथम चैरिटेबल का जल संरक्षण अभियान बना जनआंदोलन...

Share & Earn