हॉर्मुज संकट पर वैश्विक चिंता,60 देशों की आपात बैठक, भारत ने उठाई रास्ता खोलने की मांग
पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार की धुरी माने जाने वाले Strait of Hormuz को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता तेज हो गई है। इसी कड़ी में India समेत करीब 60 देशों ने एक आपात ऑनलाइन बैठक आयोजित की, जिसमें इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को जल्द से जल्द खोलने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
इस बैठक में कई देशों ने माना कि Iran द्वारा नियंत्रित इस जलडमरूमध्य के बाधित होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ रहा है। दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है, ऐसे में इसके बंद या असुरक्षित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ रही है।
वही भारत ने इस बैठक में अपना पक्ष मजबूती से रखते हुए कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता से जुड़ा विषय है। भारतीय प्रतिनिधि ने भावुक स्वर में यह भी उल्लेख किया कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिसने इस क्षेत्र में अपने तीन वीर सपूतों को खोया है। यह बयान न केवल भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है बल्कि इस संकट के मानवीय पहलू को भी सामने लाता है।
इस बैठक में शामिल अन्य देशों ने भी सामूहिक रूप से इस बात पर सहमति जताई कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी की साझा जिम्मेदारी है। कई देशों ने कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि किसी भी तरह की टकराव की स्थिति से बचा जा सके।
जहा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बाधित रहता है, तो इसका असर केवल तेल कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन, व्यापार और आर्थिक विकास पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा।
वही इस बीच, भारत ने स्पष्ट किया है कि वह शांतिपूर्ण समाधान का समर्थक है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भूमिका निभाते हुए इस मार्ग को फिर से सुरक्षित और सुचारू बनाने के प्रयास जारी रखेगा

