रेल के लिए जेल! भदौरा में गूंजा जनआक्रोश, 5000 लोगों ने दी गिरफ्तारी
इंटरसिटी स्टॉपेज और पूर्ण स्टेशन दर्जे की मांग को लेकर ऐतिहासिक जेल भरो आंदोलन
सीधी।
रेलवे इंटरसिटी ट्रेन के स्थायी स्टॉपेज एवं शंकरपुर–भदौरा रेलवे स्टेशन को पूर्ण स्टेशन का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर बुधवार को भदौरा रेलवे स्टेशन परिसर में ऐतिहासिक जेल भरो आंदोलन संपन्न हुआ। सुबह 9:30 बजे शुरू हुए इस सर्वदलीय, शांतिपूर्ण एवं गांधीवादी आंदोलन में कुसमी और मझौली विकासखंड से हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए।
इस आंदोलन का संयोजन आनंद सिंह (ददुआ) के नेतृत्व में किया गया, जिसमें आम नागरिकों के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि एवं विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी उपस्थित रहे। आंदोलन के दौरान करीब 5000 लोगों ने स्वेच्छा से गिरफ्तारी दी, जिससे क्षेत्र में रेल प्रशासन के प्रति लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा के खिलाफ जनआक्रोश साफ नजर आया।
आश्वासनों से ऊबे लोग, कार्रवाई की मांग पर अड़े
संयोजक आनंद सिंह (ददुआ) ने कहा कि इससे पहले भी इंटरसिटी स्टॉपेज को लेकर कई बार धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन दिए गए, लेकिन हर बार रेल प्रशासन और जिला प्रशासन ने केवल आश्वासन देकर मामला टाल दिया। वर्षों बीत जाने के बावजूद कोई ठोस निर्णय न होने से जनता में भारी नाराजगी है, जिसके चलते यह आंदोलन किया गया।
स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ा है रेल का मुद्दा
रेल संघर्ष समिति ने बताया कि कोरोना काल के दौरान क्षेत्र से गुजरने वाली चार पैसेंजर ट्रेनें बंद कर दी गई थीं, जो आज तक बहाल नहीं हो सकीं। इसके कारण गंभीर मरीजों, छात्रों और कामकाजी लोगों को जबलपुर जैसे बड़े शहरों तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
समिति ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल ट्रेन स्टॉपेज नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और मूलभूत अधिकारों से जुड़ा हुआ है।
स्टेशन मास्टर की पदस्थापना भी प्रमुख मांग
आंदोलनकारियों ने शंकरपुर–भदौरा स्टेशन पर शासकीय स्टेशन मास्टर की नियमित पदस्थापना की मांग भी जोर-शोर से उठाई। वक्ताओं ने कहा कि स्टेशन पर मूलभूत सुविधाओं और जिम्मेदार अधिकारियों की कमी से यात्रियों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
सर्वदलीय एकता दिखी, आंदोलन को मिला व्यापक समर्थन
इस संवेदनशील आंदोलन में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं की मौजूदगी रही, जिससे यह साफ हो गया कि यह मुद्दा राजनीति से ऊपर उठकर जनहित का है। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की भागीदारी ने आंदोलन को और मजबूती दी।
आगे और तेज होगा संघर्ष
रेल संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इंटरसिटी ट्रेन का स्थायी स्टॉपेज एवं स्टेशन को पूर्ण दर्जा देने की घोषणा नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा।
