“जहां जन्म ले रही नई ज़िंदगी, वहीं अव्यवस्थाओं का अंबार” : शिवांशु द्विवेदी
सीधी: जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सुविधाओं की वास्तविक स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। जिस स्थान पर प्रतिदिन दर्जनों महिलाओं की डिलीवरी होती है और नवजात शिशु इस दुनिया में पहला कदम रखते हैं, वहीं अस्पताल परिसर में घंटों तक जलभराव की स्थिति बनी रहने से मरीजों एवं उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार जिला चिकित्सालय के प्रसूति वार्ड एवं उसके आसपास के क्षेत्र में पानी भरा हुआ देखा गया। यह स्थिति सुबह से बनी रही, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा इसकी सुध नहीं ली गई। अस्पताल पहुंचे लोगों का कहना है कि प्रसूताओं, नवजात शिशुओं तथा उनके परिजनों को इसी जलभराव के बीच आवागमन करना पड़ रहा है, जिससे कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है।
स्थानीय युवक शिवांशु द्विवेदी ने बताया कि वह सुबह लगभग 7 बजे से जिला चिकित्सालय में मौजूद थे। सुबह 11 बजे तक भी परिसर में भरा पानी नहीं हटाया गया था। उनका कहना है कि जिस स्थान पर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए, वहां मूलभूत साफ-सफाई एवं जल निकासी की व्यवस्था तक संतोषजनक नहीं है। यदि कोई प्रसूता, बुजुर्ग व्यक्ति अथवा परिजन फिसलकर गिर जाए तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
अस्पताल में आने वाले लोगों का कहना है कि जिला चिकित्सालय जिले का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है, जहां दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में प्रसूति वार्ड जैसे संवेदनशील स्थान पर जलभराव की स्थिति न केवल अव्यवस्था को दर्शाती है बल्कि स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
लोगों का आरोप है कि अस्पताल परिसर में नियमित निगरानी एवं साफ-सफाई व्यवस्था की कमी के कारण इस प्रकार की समस्याएं बार-बार सामने आती हैं। जबकि प्रसूति वार्ड ऐसा स्थान है जहां विशेष स्वच्छता और सुरक्षा की आवश्यकता होती है। नवजात शिशुओं एवं प्रसूताओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यहां किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकती है।
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा अस्पताल प्रबंधन से मांग की है कि जिला चिकित्सालय की व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर तत्काल आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। साथ ही जल निकासी एवं साफ-सफाई की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को ऐसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।


