विधानसभा का बजट सत्र: जूली ने राज्यपाल के अभिभाषण को बताया झूठा का पुलिंदा
जयपुर: राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल का अभिभाषण और शोकाभिव्यक्ति हुई. प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्यपाल के अभिभाषण को झूठ का पुलिंदा करार दिया. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि राज्यपाल ने अभिभाषण में जो बातें कहीं है, उनमें एक भी धरातल पर नहीं उतरी है.
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विधानसभा परिसर में मीडिया से कहा कि राज्यपाल ने अभिभाषण में कहा कि किसानों को खाद और डीएपी दी, तब कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा सदन में मुस्कुरा रहे थे. मीणा जानते हैं कि किसी को भी खाद नहीं मिला. उन्होंने खुद छापे मारकर खाद और डीएपी की कालाबाजारी पकड़ी है.जूली ने कहा कि बुजुर्गों, दिव्यांगों, विधवाओं को पेंशन नहीं मिल रही है. ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस की बात सरकार ने अपने पहले बजट में की थी, उसे 2 साल हो चुके लेकिन एक भी कदम आगे नहीं बढ़ पाए.
झुंझुनू, सीकर, चूरू में यमुना समझौते के पानी के लाने की बात कर रहे हैं लेकिन एक भी रुपया उस पर खर्च नहीं हुआ. ईस्टर्न कैनल परियोजना पर एक शब्द नहीं बोला गया. इंदिरा गांधी नहर का भी बजट कम कर दिया है. पूरे साल किसान धरने पर बैठे रहे, किसान की फसल समर्थन मूल्य पर खरीद की बात कही गई है जो बिल्कुल झूठ है.
कानून व्यवस्था बदहाल
जूली ने कहा कि अभिभाषण में कहा कि आत्मरक्षा के लिए महिलाओं और बच्चियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं. कौनसी ट्रेनिंग दे रहे हैं, यह नहीं बताया गया. राज्यपाल के अभिभाषण में जो घोषणा की गई, उनमें एक भी पूरी नहीं हुई. सरकार फेल है. जो आंकड़े पेश किए हैं, वो जनता को गुमराह करने वाले हैं.
हर नागरिक पर एक लाख कर्ज
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मनरेगा को लेकर कहा कि सरकार ने गांव और गरीब व्यक्ति के काम का अधिकार छीन लिया है. जनता को गुमराह करने के लिए जी राम जी योजना लाई. पहले मजदूर को 100% पैसा केंद्र सरकार देती थी. अब 40/ 60 का रेशो कर दिया यानी 60% हिस्सेदारी राज्य की होगी, लेकिन इनके पास क्या संसाधन है?. राजस्थान पहले ही कर्जदार है. यहां के हर निवासी पर एक लाख कर्जा है. यह सिर्फ लोगों को गुमराह करने का काम कर रहे हैं. पहले गांव में लोगों को काम का अधिकार दिया जाता था, अब केंद्र सरकार तय करेगी कि कहां पर काम देना है.
पंचायतों का गलत परिसीमन
जूली ने कहा कि पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद, तहसील, उपखंड इसलिए बनते हैं ताकि जनता को सुविधा मिल सके. उनका किराया भाड़ा ज्यादा नहीं लगे और इस आधार पर परिसीमन किया जाता है, लेकिन इस सरकार ने गलत परिसीमन किया. यही वजह है कि लोग कोर्ट गए हैं क्योंकि एक-एक पंचायत के अंदर 10 किलोमीटर तक का एरिया लगा दिया गया है. बीच में दूसरी पंचायत आती है, उसके बाद उनकी पंचायत आ रही है.
बाड़मेर का हिस्सा बालोतरा और गुड़ामालानी को धोरीमन्ना में लगा दिया गया है. पहले वो 70 किलोमीटर के क्षेत्र में था, अब 170 किलोमीटर दूर भेज दिया. इस प्रकार ये लोग केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए जनता को गुमराह कर रहे हैं. आने वाले निकाय पंचायत चुनाव में जनता इन्हें सबक सिखाएगी.
