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कुसमी के जूरी बांध की नहर निर्माण में घटिया सामग्री का आरोप, ग्रामीणों ने जिला पंचायत सीईओ से की शिकायत

अमित श्रीवास्तव

By अमित श्रीवास्तव

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कुसमी के जूरी बांध की नहर निर्माण में घटिया सामग्री का आरोप, ग्रामीणों ने जिला पंचायत सीईओ से की शिकायत,65 लाख के काम पर उठे सवाल

सीधी जिले के आदिवासी अंचल कुसमी क्षेत्र में स्थित जूरी बांध की नहर निर्माण में कथित रूप से घटिया निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों ने जिला पंचायत सीईओ से शिकायत की है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम बकियां और जूरी के पास बन रही नहर में निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिसके कारण निर्माण होते ही कई जगहों पर नहर टूटने लगी है।

जहा ग्रामीणों का कहना है कि इस परियोजना की लागत करीब 65 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है। इस कार्य में बांध की मरम्मत के साथ-साथ नहर और नाली निर्माण का काम शामिल है, ताकि जूरी गांव के तीन मोहल्लों सहित आसपास के गांवों के करीब 200 हेक्टेयर खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंच सके। लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

वही ग्रामीणों के अनुसार नहर निर्माण में सीमेंट की मात्रा कम डाली जा रही है और घटिया किस्म के रेत का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा नहर की मोटाई और गहराई भी मानक से काफी कम रखी गई है, जिसके कारण नहर में पानी रुक ही नहीं पाता और यह नाली की तरह दिखाई देती है। ग्रामीणों का कहना है कि इस वजह से खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे किसान परेशान हैं और कई किसानों की गेहूं की बुवाई भी प्रभावित हुई है।

वही ग्राम जूरी के निवासी अर्जुन सिंह ने बताया कि इस निर्माण कार्य की शिकायत पहले भी कई बार की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि काम सिंचाई विभाग की नहर का है, जबकि निर्माण कार्य ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) के माध्यम से कराया जा रहा है।

अब ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया है, जिससे कार्य की लागत, एजेंसी और समय सीमा की जानकारी लोगों को नहीं मिल पा रही है। वहीं मजदूरों का भुगतान भी अब तक लंबित बताया जा रहा है।

वही इस मामले में जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि उन्हें पहले इसकी जानकारी नहीं थी, लेकिन अब ग्रामीणों की शिकायत मिली है। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता किया गया है तो इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही यह सिंचाई विभाग का कार्य हो, लेकिन यदि आरईएस का नाम सामने आया है तो मामले की जांच कर गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी।

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