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हम जीवन में जो भी करते हैं, खुशी पाने के लिए करते हैं,

हम जीवन में जो भी करते हैं, खुशी पाने के लिए करते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से खुश रहना काफी मुश्किल काम लगता है। हमें लगता है कि खुश रहने के लिए कुछ खास तरह के हालात होने चाहिए, तभी हम खुश रह सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। सद्‌गुरु बता रहे हैं कुछ आसान से नुस्खे जिन्हें अपना कर हर हाल में, हम खुश रह सकते हैं।

 

सद्‌गुरु : जब आप बुनियादी रूप से खुश होते हैं, जब आपको खुश रहने के लिए कुछ करना नहीं पड़ता, तो आपके जीवन के हर आयाम में बदलाव आ जाएगा। आपके अनुभवों में और खुद को व्यक्त करने के तरीकों में बदलाव आ जाएगा। आपको पूरी दुनिया बदली हुई लगेगी। आपका अब कोई निहित स्वार्थ नहीं होगा क्योंकि चाहे आप कुछ करें या न करें, चाहे आपको कुछ मिले या न मिले, चाहे कुछ हो या न हो, आप स्वभाव से ही आनंदित होंगे। जब आप अपने स्वभाव से ही खुश होते हैं, तो आप जो भी करेंगे, वह बिल्कुल अलग स्तर पर

1. ध्यान रखें कि खुश रहना आपकी बुनियादी जिम्मेदारी है

किसी इंसान की पहली और सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी एक खुशमिजाज प्राणी होने की है। खुश रहना जीवन का चरम पहलू नहीं है। यह जीवन का बुनियादी पहलू है। अगर आप खुश नहीं हैं, तो आप अपने जीवन में क्या कर सकते हैं ? एक बार आप खुश हों, तभी दूसरी महान संभावनाएं खुलती हैं।

 

चाहे आप जो भी करें, आप अपने अंदरूनी गुणों को ही विस्तार देते हैं और जगाते हैं। चाहे आप इस बात को पसंद करें या नहीं, हकीकत यही है। जब तक कि कोई महत्वपूर्ण चीज आपके भीतर घटित नहीं होती, आप दुनिया के लिए कुछ बहुत महत्वपूर्ण नहीं कर सकते। इसलिए अगर आप दुनिया के बारे में चिंतित हैं, तो पहली चीज आपको यह करनी चाहिए कि खुद को एक खुशमिजाज प्राणी में रूपांतरित करें।

2. पहचानें कि खुशी आपकी मूल प्रकृति है

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप अपने जीवन में क्या कर रहे हैं, चाहे वह कारोबार हो, सत्ता, शिक्षा या सेवा, आप ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि आपके भीतर कहीं गहराई में एक भावना है कि इससे आपको खुशी मिलेगी। इस धरती पर हम जो कुछ भी करते हैं, वह खुश रहने की इच्छा से करते हैं, क्योंकि यह हमारी मूल प्रकृति है। जब आप बच्चे थे, तो आप यूं ही खुश थे। वही आपकी प्रकृति है। खुशी का स्रोत आपके भीतर है, आप उसे हमेशा के लिए एक जीवंत अनुभव बना सकते हैं।

 

3. चीजों का महत्व पहचानें

आज सुबह, क्या आपने देखा कि सूर्य बहुत अद्भुत तरीके से उगा? फूल खिले, कोई सितारा नीचे नहीं गिरा, तारामंडल बहुत अच्छी तरह काम कर रहे हैं। सब कुछ व्यवस्थित है। आज समूचा ब्रह्मांड बहुत बढ़िया तरीके से काम कर रहा है मगर आपके दिमाग में आया किसी विचार का एक कीड़ा आपको यह मानने पर मजबूर कर देता है कि आज बुरा दिन है।

कष्ट मुख्य रूप से इसलिए होता है क्योंकि ज्यादातर इंसान इस जीवन के प्रति सही नजरिया खो बैठे हैं। उनकी मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया अस्तित्व की प्रक्रिया से कहीं बड़ी हो गई है या सीधे-सीधे कहें तो आपने अपनी रचना को स्रष्टा की सृष्टि से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। यह सारी पीड़ा का बुनियादी स्रोत है। हम इस बात की पूरी समझ खो बैठे हैं कि यहां जीवित रहने के क्या मायने हैं। आपके दिमाग में आया कोई विचार या आपके मन की कोई भावना फिलहाल आपके अनुभव की प्रकृति को तय करती है। और यह भी हो सकता है कि आपके विचार और भावना का आपके जीवन की सीमित हकीकत से कोई लेना-देना न हो। पूरी सृष्टि बहुत बढ़िया तरीके से घटित हो रही है मगर सिर्फ एक विचार या भावना सब कुछ नष्ट कर सकती है।

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