मध्य प्रदेश high court में सरकार की अपील खारिज, सारे सबूत पेश नहीं करना बौद्धिक बेईमानी
जबलपुर : पन्ना में साढ़े 5 साल पहले एक महिला की जलने से मौत हो गई. मरने से पहले दिए बयान में महिला ने इसे हादसा बताया था. पुलिस ने पति के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और गैरइदातन हत्या का मामला दर्ज किया. केस पर जब पन्ना जिला न्यायालय का फैसला आया तो पति को दोषमुक्त कर दिया गया. इसके खिलाफ अभियोजन पक्ष ने हाई कोर्ट में अपील दायर की. इस पर फैसला देते हुए high court ने राज्य सरकार यानी अभियोजन पक्ष पर तल्ख टिप्पणी की.
सरकार की ओर से दायर अपील खारिज
मध्य प्रदेश high court जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस राम कुमार चौबे ने दायर अपील की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा “नायब तहसीलदार द्वारा दर्ज किये गये मृत्युपूर्व बयान पेश नहीं कर अभियोजन ने बौद्धिक बेईनामी की है.” युगलपीठ ने सुनवाई के बाद पत्नी की जलने से हुई मौत के बाद में आरोपी पति के दोषमुक्त किये जाने के खिलाफ सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया.
महिला की जलने से हुई थी मौत
पन्ना जिला न्यायालय द्वारा पत्नी की जलने से हुई मौत के मामले में आरोपी पति प्रकाश विश्वास को गैर इरादतन हत्या और दहेज उत्पीड़न के मामले में दोषमुक्त किया था. अभियोजन पक्ष यानी सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील दायर की.
युगलपीठ ने प्रकरण का अवलोकन करते हुए पाया “पन्ना निवासी कविता विश्वास को जलने के कारण 30 मई 2020 को अस्पताल में भर्ती किया गया था. उसने अपने मृत्यु बयान में कहा था कि उस पर गर्म चाय गिर गयी थी. इसके लिए कोई जिम्मेदार नहीं है.”
मृत्यु पूर्व नायब तहसीलदार को दिए बयान
इसके कुछ दिन बाद महिला की उपचार के दौरान 26 जून 2020 को उनकी मौत हो गई. महिला के मृत्यु पूर्व बयान उसके माता-पिता और भाई की मौजूदगी में नायब तहसीलदार दीपा चतुर्वेदी ने दर्ज किये थे. युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है “अभियोजन ने नायब तहसीलदार द्वारा दर्ज किये गये मृत्यु पूर्व पेश क्यों नहीं किए. अभियोजन एक राज्य है और उसे जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सभी सबूत पेश करने चाहिए, जिससे न्यायालय अपने नतीजे तक पहुंच सके.”मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा “ये बौद्धिक बेईमानी है. राज्य ने दूसरी अपीलों की तरह यह अपील भी बिना सोचे-समझे दायर की है.”
