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Mauganj news:पाती मिसरान ग्राम की प्राथमिक शाला बदहाली की मिसाल बनी, बच्चे मवेशियों के बाड़े में पढ़ने को मजबूर

Manoj Shukla

By Manoj Shukla

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Mauganj news:फूस की झोपड़ी में भविष्य की नींव! पाती मिसरान ग्राम की प्राथमिक शाला बदहाली की मिसाल बनी, बच्चे मवेशियों के बाड़े में पढ़ने को मजबूर

Mauganj news: हनुमना जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत पाती मिसरान में स्थित शासकीय प्राथमिक पाठशाला कोलही इन दिनों बदहाल शिक्षा व्यवस्था की जीती-जागती तस्वीर बनकर सामने आई है। गांव में ऐसा कोई पक्का भवन नहीं है, जहाँ छोटे बच्चे सुरक्षित बैठकर पढ़ सकें। मजबूरी में मासूमों की पढ़ाई एक फूस और टाट से बनी झोपड़ी में कराई जा रही है, जिसका वीडियो गुरुवार शाम से सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है।

इस वायरल वीडियो में बच्चे उसी झोपड़ी में बैठकर पाठ पढ़ते दिख रहे हैं, जिसे गांव वाले रात में मवेशियों को बांधने के लिए इस्तेमाल करते हैं। तंग और बदबूदार माहौल में पढ़ने को मजबूर नन्हे विद्यार्थी शिक्षा व्यवस्था की जमीनी सच्चाई बयां कर रहे हैं।

भवन न होने से आधे बच्चे ही पहुंच पा रहे स्कूल

Mauganj news: शाला के दस्तावेज बताते हैं कि स्कूल में 60 से अधिक बच्चों का नाम दर्ज है, लेकिन मजबूरी में लगे इस अस्थायी कक्ष ने बच्चों की नियमित उपस्थिति पर गहरी चोट की है। रोजाना केवल 25 से 30 बच्चे ही पहुंच पाते हैं। गर्मी हो या ठंड, बच्चों को खुले फूस वाले कमरे में बैठना पड़ता है, जहां फर्नीचर जैसी मूलभूत व्यवस्था भी नहीं है।

इससे पहले यह स्कूल एक पुराने जर्जर भवन में संचालित होता था, जिसकी दीवारें बारिश और तेज हवा में गिरने की स्थिति में थीं। सुरक्षा को देखते हुए ग्रामीणों और शिक्षकों ने उसे बंद कर दिया और फिर यह झोपड़ीनुमा इंतज़ाम शिक्षा का सहारा बना।

स्थानीय कलाकार की आवाज़ भी उठी

गांव के कलाकार राजेश द्विवेदी ने भी इस जमीनी हकीकत को अपने गीतों में पिरोकर प्रशासन तक पहुंचाने की कोशिश की है। उनके गीत अब ग्रामीणों की पीड़ा और बच्चों की शिक्षा की लड़ाई का माध्यम बन रहे हैं।

ग्रामीणों की शासन से गुहार “बच्चों को दें सुरक्षित भविष्य”

स्थानीय लोगों का कहना है कि पढ़ाई केवल किताबों से नहीं होती, इसके लिए सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक वातावरण जरूरी है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से प्राथमिक पाठशाला कोलही के लिए जल्द से जल्द पक्का भवन स्वीकृत करने की मांग की है। उनका विश्वास है कि यदि समय रहते स्थायी भवन मिल गया, तो गांव के बच्चों का भविष्य संवर सकता है।

Manoj Shukla

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मै मनोज कुमार शुक्ला 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है।

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