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मिलिए 100 बच्चों की मां से,जिन्होंने अपना सारा जीवन कर दिया कुर्बान

Manoj Shukla

By Manoj Shukla

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Mother’s day: मां की ममता स्पेशल स्टोरी

एक ऐसी मां है जिन्होंने अपने जीवन के 34 साल बेसहारा और अनाथ बच्चों के भविष्य को बनाने में लगा दिए. आज इस मां के सैकड़ो बच्चे हैं. जो इन्हें छोटी मां के नाम से पुकारते हैं. वह भी इन्हें बड़े ही प्यार दुलार से रखती हैं. उनका लालन-पालन करती हैं. पढ़ाने लिखाने से लेकर शादी करने तक का जिम्मा उठाती हैं।यह मां अब तक 18 अनाथ बेटियों के धूमधाम से शादी कर चुकी हैं.

Mother’s day: यह कहानी सागर की प्रतिमा अरजरिया की है. जिसकी शुरुआत साल 1990 में उनकी सासू मां सत्यभामा अरजरिया ने की थी. इस आश्रम के सभी बच्चे दादी मां के नाम से जानते हैं. वह आज इस दुनिया में नहीं है लेकिन उनके द्वारा जिन सैकड़ो बच्चों को सहारा दिया गया.वह आज भी याद करते हैं. दादी मां सत्यभामा 2007 में ही इस दुनिया को छोड़कर चली गई थी।

लेकिन उन्होंने सैकड़ो अनाथ और बेसहारा बच्चों को नया जीवन दिया उन्होंने सागर में अनाथ आश्रम खुला था जिसे संजीवनी बाल आश्रम के नाम से जाना जाता है. यह आश्रम मकरोनिया के रजाखेड़ी में स्थित है. इतनी बड़ी जिम्मेदारी उठाने के लिए उनके परिवार का भी हमेशा से सहयोग रहा है. 

Mother’s day: उनका कहना है कि आज जब इन बच्चों को देखते हैं तो उन्हें बहुत खुशी होती है जिनकी शादियां हो गई हैं. घर बस गए हैं उनको देखकर मन में बड़ी प्रसन्नता है. क्योंकि शुरू से ही माता जी के साथ हमारे परिवार की ऐसी इच्छा थी कि समाज के लिए कुछ करना है, इसमें उनके परिवार में कोई इंडस्ट्री का काम करता है तो कोई रिटायर्ड कर्मचारी है शुरुआत से ही सभी लोगों ने सहयोग दिया जिसकी वजह से इन बच्चों का लालन पालन हो पा रहा है।

आश्रम की संचालिका मां प्रतिमा अरजरिया बताती है कि उनकी सासू मां ने साल 1990 में इसकी शुरुआत की थी घर में एक काम करने वाली विधवा महिला थी उनकी दो छोटे-छोटे बच्चे थे अचानक उनका निधन हो गया।

इन बच्चों का कोई नहीं था घर के ही एक कमरे में इन दोनों बच्चों को रख लिया और उनके लिए एक आया भी लगाईं, इसके बाद ऐसे दो और बच्चों की जानकारी मिली तो उन्हें भी रख लिया।

इस तरह समाज के लिए कुछ करने की शुरुआत हुई चार बच्चों से आश्रम शुरू हुआ 2007 तक उन्होंने इसका संचालन किया. तब केवल परिवार के लोगों का ही सहयोग रहता था 2007 के बाद सासू मां शांत हो गई इसके बाद इसकी जिम्मेदारी में संभाल रही हूं।

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मै मनोज कुमार शुक्ला 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है।

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