Mp news : मनरेगा में फिर मचा घोटाला! पंचायत में फर्जी जॉब कार्ड बनाकर लूटा गया सरकारी खजाना, नाम-पता फर्जी, फिर भी महीनों तक मिला काम
Mp news : सीधी जिले के आदिवासी अंचल कुसमी अंतर्गत ग्राम पंचायत कोड़ार में मनरेगा योजना के नाम पर एक बार फिर सरकारी खजाने को चूना लगाने की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। सचिव और रोजगार सहायक की मिलीभगत से फर्जी जॉब कार्ड बनाकर महीनों तक मजदूरी निकाली जाती रही, जबकि जिनके नाम से यह जॉब कार्ड बनाए गए हैं, वे उस पंचायत के निवासी ही नहीं हैं।
पूरा मामला उस समय सामने आया जब ग्राम पंचायत कोड़ार के जॉब कार्ड नंबर MP15-007-032-001/50A की जांच की गई। यह जॉब कार्ड 1 जुलाई 2022 को विपिन सिंह नामक व्यक्ति के नाम पर बनाया गया था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें विपिन सिंह के पिता का नाम भी विपिन सिंह ही दर्ज है। जब वोटर लिस्ट खंगाली गई तो यह साफ हो गया कि पंचायत में विपिन सिंह नाम का कोई भी व्यक्ति निवासी नहीं है।
Mp news : इसके बावजूद इस फर्जी नाम पर जॉब कार्ड बनाकर उसे 2 जुलाई 2022 से काम पर दिखाया गया और 2025 तक लगातार भुगतान भी किया गया। यानी न सिर्फ जॉब कार्ड फर्जी, बल्कि उस पर काम का रिकॉर्ड भी पूरी तरह से मनगढ़ंत है। यह सरकार की उस योजना के साथ खुला मज़ाक है, जिसे ग्रामीण गरीबों को उनके पंचायत क्षेत्र में ही रोजगार देने के उद्देश्य से बनाया गया था।
मनरेगा अधिनियम की धारा 25 के अनुसार अगर किसी भी व्यक्ति या अधिकारी के पास बगैर वैध दस्तावेज और नियमों के जॉब कार्ड पाया जाता है, तो यह दंडनीय अपराध माना जाएगा।
जब इस मामले में ग्राम पंचायत कोड़ार की सरपंच सीता सिंह से बात की गई, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा “मेरे पंचायत में विपिन सिंह नाम का कोई भी व्यक्ति नहीं है। यह पूरा मामला फर्जीवाड़े का प्रतीत हो रहा है।”
जनपद पंचायत कुसमी के सीईओ ज्ञानेंद्र मिश्रा से जब इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने कहा “मामला मेरे संज्ञान में अभी तक नहीं आया था, लेकिन अब इसकी जांच करवाई जाएगी। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उस पर सख्त कार्यवाही की जाएगी।”
अब सवाल यह उठता है कि जब न तो व्यक्ति पंचायत का निवासी है, न ही वोटर लिस्ट में दर्ज है, तो फिर उसे जॉब कार्ड किस आधार पर जारी किया गया? आखिर किसके इशारे पर यह घोटाला हुआ?
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