National Energy Policy-2026:- केंद्र सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि बिजली क्षेत्र में लंबे समय से चल रही मुफ्त बिजली और भारी सब्सिडी की राजनीति अब ज्यादा दिनों तक जारी नहीं रहेगी। बुधवार को बिजली मंत्रालय द्वारा जारी राष्ट्रीय ऊर्जा नीति (एनईपी)-2026 के मसौदे में यह स्पष्ट किया गया है कि उद्योगों को महंगी बिजली बेचकर अन्य वर्गों को लागत से कम दर पर बिजली देने की परंपरा पर चरणबद्ध तरीके से रोक लगेगी। यह मसौदा आगामी बिजली संशोधन विधेयक-2026 का आधार बनेगा, जिस पर केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल सभी राज्यों के बिजली मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों से विमर्श करेंगे।
एनईपी-2026 का मुख्य उद्देश्य बिजली वितरण कंपनियों (डिस्काम) की खराब वित्तीय स्थिति को सुधारना है। नीति में कहा गया है कि यदि राज्य सरकारें बिजली पर सब्सिडी देना चाहती हैं, तो इसके लिए बजट में पहले से प्रावधान करना अनिवार्य होगा। साथ ही लागत-आधारित टैरिफ लागू करने पर जोर दिया गया है, ताकि डिस्काम कर्ज के जाल से बाहर निकल सकें। वर्तमान में देश की डिस्काम पर लगभग 7.18 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है और कुल घाटा 6.9 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
National Energy Policy-2026:- नीति के अनुसार यदि राज्य विद्युत नियामक आयोग समय पर टैरिफ आदेश जारी नहीं करते हैं, तब भी स्वचालित वार्षिक संशोधन प्रणाली के तहत बिजली दरों में बढ़ोतरी की जाएगी। किसी भी हाल में बिजली की कीमत आपूर्ति लागत से कम नहीं रखी जाएगी।
एनईपी-2026 में मैन्युफैक्चरिंग, रेलवे और मेट्रो को क्रॉस सब्सिडी व सरचार्ज से छूट देने का प्रस्ताव है, जिससे भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़े और लॉजिस्टिक लागत घटे। वहीं 1 मेगावाट या उससे अधिक लोड वाले उपभोक्ता किसी भी डिस्काम से बिजली खरीद सकेंगे।
National Energy Policy-2026:- इसके अलावा नीति में 2030 तक सभी कृषि फीडरों के सोलराइजेशन और किसानों को दिन में स्थिर बिजली आपूर्ति का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि इन सुधारों से बिजली क्षेत्र को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकेगा और दीर्घकाल में उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलेगा।
