रीवा के दुआरी में डॉ. राजनारायण शुक्ला की जैविक खेती बनी आकर्षण का केंद्र, देखने पहुंच रहे किसान और युवा
विंध्य क्षेत्र के रीवा जिले के दुआरी गांव में जैविक खेती कर रहे डॉ. राजनारायण शुक्ला इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। उनकी खेती को देखने के लिए लोगों की कतारें लग रही हैं। आज सीधी और रीवा जिले से बड़ी संख्या में किसान और युवा उनके खेतों में पहुंचे, जहां उन्होंने जैविक पद्धति से की जा रही खेती को करीब से देखा और उनसे सलाह भी ली।
डॉ. राजनारायण शुक्ला ने इस वर्ष अपने खेतों में जैविक तरीके से चने की खेती की है, जिसकी लोग काफी सराहना कर रहे हैं। खास बात यह है कि पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने के बाद भी उन्होंने खेती को ही अपना प्रमुख कार्य बनाया और जैविक खेती को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं।
गौरतलब है कि भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार भी जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को लगातार प्रोत्साहित कर रही हैं और रीवा में इसको लेकर बड़े स्तर पर कार्यक्रम भी आयोजित किए जा चुके हैं।
मीडिया से बातचीत में डॉ. राजनारायण शुक्ला ने कहा कि आज के समय में किसानों के लिए जैविक खेती करना बेहद जरूरी हो गया है। रासायनिक खेती के कारण कई प्रकार की बीमारियां बढ़ रही हैं, वहीं रासायनिक खाद और अन्य संसाधनों के लिए किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि वे अपने खेतों में औषधीय खेती भी कर रहे हैं, जिसमें कई प्रकार के औषधीय पेड़-पौधे लगाए गए हैं। इनका उपयोग वे स्वयं भी करते हैं और दूर-दूर से बीमारियों से ग्रसित लोग भी इन औषधियों का लाभ लेने पहुंचते हैं।
डॉ. शुक्ला ने यह भी कहा कि यदि किसान जैविक खेती अपनाते हैं तो इससे गौवंश का संरक्षण भी संभव है, क्योंकि जैविक खेती में गोबर और गोमूत्र का उपयोग होता है, जिससे लोग गौवंश का पालन-पोषण भी करेंगे।
डॉ. राजनारायण शुक्ला आज युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं और लगातार लोगों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यही वजह है कि उनकी खेती इन दिनों पूरे विंध्य क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

