राजनीति

मोहम्मद गौरी का जीवन परिचय

हां यह जानते हैं उसने कितने युद्ध किया

मुहम्मद ग़ौरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच तराइन के मैदान में २ युद्ध हुए। ११९१ ई. में हुए तराईन के प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की जीत हुई। मोहम्मद गौरी भारत पर कब्जा करना चाहता था। परन्तु उस समय के भारत के सबसे शक्तिशाली राजा सम्राट पृथ्वीराज चौहान उसके रास्ते का रोढ़ा थे। वह हर बार सम्राट से हार जाता था और उनके पैरों में गिरकर माफ़ी मांग लेता, क्योंकि राजपूतों का सिध्दांत था कि वे निहत्थे या शरणागत पर वार नहीं करते थे। सम्राट ने उसे बार बार माफ किया। वह जब भी आक्रमण करता महाराज की सेना उसकी सेना को गाजर मूली की तरह काट देती थी। तराइन कि अन्तिम लड़ाई (तराई का द्वितीय युद्ध ११९२) में गौरी को विश्वासघाती जयचंद का साथ मिल गया जिसने सम्राट के साथ दिल्ली की सत्ता की लालच में धोखा किया (हालाकिं बाद में गौरी ने उसे भी यह कहते हुए मार दिया कि जो अपने वतन का न हो सका वो मेरा क्या होगा)। इस युध्द में ग़ौरी ने जयचन्द से मिलकर रात में सोते हूए महाराज के सैनिकों पर आक्रमण कर दिया। उसके साथ जयचंद की सेना भी थी। परिणामस्वरूप सम्राट को वह बंदी बनाकर अफगानिस्तान ले गया। उनके साथ उनके मित्र एवं महान कवि चंद्रबरदाई को भी बंदी बनाकर रखा गया था। वहां वह रोज सम्राट पर अत्याचार करता। सम्राट की आँखे बहुत तेज थी जिससे गौरी को देखने में बहुत डर लगता था। इसलिए उसने सम्राट की आँखों को लोहे के सरिये से फूड़वा डाला। एक दिन गौरी ने एक तीरंदाजी प्रतियोगिता का आयोजन करवाया। महाराज ने भी उसमें भाग लेने की इच्छा जताई। ग़ौरी ने उनसे कहा बिना आँखो के कैसे तीर चलाओगे। तब चंद्रबरदाई ने ग़ौरी से कहा की सम्राट को शब्दभेदी बाण (केवल आवाज़ सुनकर तीर चलाने की कला) चलाना आता है। ग़ौरी चौक गया क्योंकि उसने इस तरह की विद्या के बारे में पहली बार सुना। उसे यह कला देखने की इच्छा हुई। उसने महाराज से कला प्रदर्शन करने के लिए कहा। सम्राट को उसे मारने का मौका मिल गया। तीर चलाते- चलाते महाराज से चंद्रबरदाई ने निम्न पंक्तियाँ ग़ौरी की स्थिति बताते हुए कही-

“चार बाँस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण। ता ऊपर सुलतान है, मत चुके चौहान।।”

(मतलब ग़ौरी चार बाँस और 24 गज और 8 अंगुल की ऊँचाई पर तख़्त पर बैठा है ऐसा मेरा परिमाण (नाप) है उसे मारने में चूक मत न करो महाराज) चंद्रबरदाई के इतना कहते ही सम्राट पृथ्वीराज ने ग़ौरी की तरफ तीर चलाया जिससे गोरी मारा गया । फिर चंद्रबरदाई ने उनका सिर काट दिया और उनहोंने भी सर धड़ से अलग होते हुए भी चंद्रबरदाई का सर काट दिया। ऐसा उनहोंने इसलिए किया क्योंकि वे शत्रु के हाथों नहीं मरना चाहते थे बाद मैं दिल्ली के आस पास खोखर रोड़ योद्धाओं ने अपने राजा पृथ्वीराज चौहान का बदला लेने के लिए गियासुद्दीन गौरी( मुहम्मद गोरी का बड़ा भाई)का सिर काट दिया । मोहम्मद ग़ौरी ने चंदावर के युद्ध (११९२ ई.) में दिल्ली के गहड़वाल वंश के शासक जयचंद को पराजित किया। मुहम्मद ग़ौरी ने भारत में विजित साम्राज्य का अपने सेनापतियों को सौंप दिया और वह ग़ज़नी चला गया। बाद में ग़ौरी के ग़ुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक ने ग़ुलाम राजवंश

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