सीधी के कुआ ग्राम में गूंजा भक्ति का स्वर, गोवर्धन पूजा प्रसंग ने मोहा सभी का मन
एमपी के सीधी जिले के रामपुर नैकिन जनपद पंचायत अंतर्गत कुआ ग्राम इन दिनों भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंगा हुआ है, जहां श्रीमद भागवत कथा का दिव्य आयोजन श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति करा रहा है। कथा के पांचवें दिन का मुख्य आकर्षण गोवर्धन पूजा का पावन प्रसंग रहा, जिसे सुनकर कथा पंडाल में उपस्थित श्रोतागण भाव-विभोर हो उठे।
जहा कथावाचन कर रहे श्री वत्सल जी महाराज, जो श्री धाम वृन्दावन से पधारे हैं, ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत धारण करने की लीला का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि यह प्रसंग केवल एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि प्रकृति, करुणा और संरक्षण का गहन संदेश भी समेटे हुए है। महाराज श्री ने समझाया कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अभिमान का हरण कर ब्रजवासियों को यह शिक्षा दी कि प्रकृति और गोवर्धन पर्वत जैसे जीवनदायी तत्वों की पूजा एवं संरक्षण ही सच्ची आस्था है।
वही इस कथा के दौरान गोवर्धन पूजा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह पर्व मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलन, कृतज्ञता और सहअस्तित्व का प्रतीक है। उनके ओजस्वी एवं सरल प्रवचन ने श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति का संचार कर दिया।
जहा इस धार्मिक आयोजन में कथा श्रवण करने पहुंचे भगवानदीन मिश्रा एवं उनकी धर्मपत्नी उर्मिला मिश्रा की श्रद्धा विशेष चर्चा का विषय रही। दंपति ने सपत्नीक भागवत कथा का रसपान किया। भगवानदीन मिश्रा ने बताया कि उन्होंने अपने घर में पौत्रों के ब्रतबंध संस्कार से पूर्व भागवत कथा सुनने का प्रण लिया था। उनका मानना है कि जीवन के प्रत्येक शुभ संस्कार से पहले भगवान की कथा सुनना घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और मंगल का संचार करता है। इसी संकल्प और श्रद्धा के चलते उन्होंने कथा में सहभागिता की।
वही ग्राम कुआ में चल रहे इस आयोजन ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचकर धर्म, भक्ति और संस्कारों का अमृतपान कर रहे हैं। भजन, प्रवचन और आध्यात्मिक विचारों से सुसज्जित यह आयोजन न केवल धार्मिक चेतना को जागृत कर रहा है, बल्कि सामाजिक समरसता और नैतिक मूल्यों को भी सुदृढ़ बना रहा है।

