Sidhi news:संजय टाइगर रिज़र्व में मानव–वन्यजीव संघर्ष का खौफनाक चेहरा: लकड़ी बीनने गया युवक जंगली हाथी के हमले में गंभीर घायल, जिला अस्पताल में ज़िंदगी और मौत से जंग
Sidhi news:सीधी जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्र में मानव और वन्यजीव संघर्ष एक बार फिर सामने आया है। संजय टाइगर रिज़र्व एरिया अंतर्गत जनपद पंचायत कुशमी के ग्राम कुंदौर में ठंड से बचने के लिए जंगल गया एक युवक जंगली हाथी के हमले का शिकार हो गया। हमले में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है, जहां वह जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम कुंदौर निवासी शिवपूजन सिंह पिता गणेश सिंह (उम्र 27 वर्ष) बीते 2 जनवरी को दोपहर करीब 12 बजे संजय टाइगर रिज़र्व के वन परिक्षेत्र पोंडी के कोर एरिया में स्थित जंगल में सूखी लकड़ी बीनने गया था। इसी दौरान दिठोर नाला के पास उसका सामना एक जंगली हाथी से हो गया। हाथी को देखकर युवक घबरा गया और जान बचाने के लिए दौड़ लगाने लगा, लेकिन कुछ ही दूरी पर असंतुलित होकर वह औंधे मुंह गिर पड़ा। मौके का फायदा उठाते हुए हाथी ने युवक की कमर, कूल्हे और पैर को बुरी तरह कुचल दिया और उसे मृत समझकर आगे बढ़ गया।
Sidhi news:गंभीर रूप से घायल शिवपूजन दर्द से कराहते हुए किसी तरह खुद को घसीटकर पास ही बने वाच टावर तक पहुंचा और मोबाइल फोन के जरिए परिजनों को घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और संजय टाइगर रिज़र्व के अधिकारियों को जानकारी दी गई। इसके बाद वन विभाग की टीम ने तत्परता दिखाते हुए घायल युवक को जिला चिकित्सालय पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है।
परिजनों का कहना है कि वन विभाग ने निजी खर्च पर इलाज कराने और युवक के पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद बिल-बाउचर जमा करने पर उपचार खर्च का भुगतान करने की बात कही है। वहीं, क्षेत्र में पिछले चार महीनों से एक जंगली हाथी के अकेले विचरण की भी जानकारी सामने आई है। बताया गया कि पहले दो हाथी शहडोल सीमा से इस क्षेत्र में आए थे, जिनमें से एक को ट्रेंकुलाइज कर बांधवगढ़ भेज दिया गया, जबकि दूसरा हाथी अब भी संजय टाइगर रिज़र्व में स्वच्छंद घूम रहा है।
इस पूरे मामले में एसडीओ सुधीर मिश्रा ने बताया कि एक व्यक्ति के घायल होने की सूचना मिली है। मामले की जांच की जा रही है, घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और फिलहाल हाथी को जंगल की ओर खदेड़ दिया गया है। यह घटना एक बार फिर आदिवासी इलाकों में मानव–वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को उजागर करती है।
