Sidhi news:ऋषिकेश फ़ाउण्डेशन की बाल सेना मोगली पलटन तीन माह के रणनीतिक विश्राम के बाद एक बार फिर सड़क पर उतरी है। इस बार सड़क शहर की नहीं गाँव की है। ज्ञात हो मोगली पलटन द्वारा पिछले एक साल तक मिशन रामबाण चलाया गया था। मिशन रामबाण का उद्देश्य जेनेरिक दवाओं के प्रति जनजागरण था। इसके अंतर्गत हर माह के प्रथम रविवार को कछुआ चाल रैली आयोजित की जाती रही थी। मोगली पलटन एक बार फिर से वही तेवर और नया कलेवर के साथ कछुआ चाल रैली 2.0 के साथ सड़कों पर है। इस बार रैली का विषय, गाय हय ता गाँव हय, रखा गया है। रैली हनुमानगढ़ गाँव के स्व॰ श्री चन्द्रप्रताप तिवारी प्रतिमा स्थल से माननीय चन्द्रप्रताप तिवारी जी का आशीर्वाद लेकर प्रारम्भ की गयी।
Sidhi news:रैली गाँव की मुख्य आबादी वाली सड़क से गुजरती हुई गाँव के दूसरे छोर पर समाप्त हुयी। गाँव में जहाँ एक तरफ़ आवारा पशुओं की समस्या बढ़ रही है तो दूसरी तरफ़ दूध की क़िल्लत हो रही है। एक तरफ़ किसानों में यूरिया डीएपी के लिए हाहाकार मचा हुआ है, तो दूसरी तरफ़ पूरा भारत डायबिटीज़ की विश्व राजधानी बन गया है। एक तरफ़ युवा बेरोजगार दर-दर भटक रहे हैं, तो दूसरी तरफ़ गाय हाईवे में कुचली जा रही हैं। कछुआ चाल रैली का उद्देश्य यही बताना है कि गाय सिर्फ़ दूध भर नहीं देती बल्कि सही जानकारी होने और उचित प्रबंधन किए जाने पर इन सभी समस्याओं का समग्र समाधान भी है। गोबर से दिया, गमला, खिलौने आदि उत्पाद बनाये जा सकते हैं, जो पर्यावरण हितैषी होने के साथ गाँव में रोजगार का अवसर प्रदान करते हैं। गोबर से प्राकृतिक पेंट भी बनाया जा सकता है। एलपीजी सिलेंडर दिन बदिन महँगा हो रहा है साथ ही इसके खनन, निष्कर्षण और रिफाइनिंग प्रक्रिया में पर्यावरण को बहुत नुकसान भी होता है । इसका सीधा सरल समाधान गोबर गैस है। गोबर से बनी खाद खेतों के लिए हितकर और हमारे लिए अमृत है। इसीलिए मोगली पलटन कह रही है कि गाय हय ता गाँव हय।
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