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Silver के हाथ फूल और बिछिया,परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम

Manoj Shukla

By Manoj Shukla

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Silver के हाथ फूल और बिछिया,परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम

भारतीय आभूषण कला में चांदी (Silver) का हाथ फूल और बिछिया एक ऐसा आकर्षक संयोजन है, जो परंपरा और आधुनिकता दोनों का सुंदर मेल पेश करता है। यह आभूषण न सिर्फ महिलाओं की शोभा बढ़ाता है बल्कि भारतीय संस्कृति की कलात्मक धरोहर का प्रतीक भी है। इसे बनाने की प्रक्रिया में शुद्ध चांदी, रंगीन पत्थर, कृत्रिम मोती और बारीक कारीगरी का विशेष ध्यान रखा जाता है।

कैसे बनता है चांदी का हाथ फूल सेट

सबसे पहले शुद्ध चांदी (Silver)को पिघलाकर आवश्यक माप के अनुसार रोलिंग और शेपिंग की जाती है। इसके बाद कारीगर विशेष कास्टिंग या मोल्ड तैयार करते हैं, जिसमें बारीक डिज़ाइन उकेरे जाते हैं। डिज़ाइन तैयार होने के बाद उसमें पत्थरों, मोतियों और मीनाकारी की सुंदर जड़ाई की जाती है। फिर कलाई और उंगलियों के माप के अनुसार रिंग और चेन को जोड़कर हाथ फूल को अंतिम रूप दिया जाता है। इस प्रक्रिया में धागे या धातु के जोड़ से कलाई और उंगलियों को संतुलित ढंग से जोड़ा जाता है ताकि पहनने में सुविधा और आकर्षण दोनों बने रहें।

बिछिया बनाने की कला

बिछिया तैयार करने में भी शुद्ध चांदी की बारीक तार का उपयोग किया जाता है। इसे गोलाई में मोड़कर बीच में डिज़ाइन उकेरा जाता है। कई बार इसमें नक़्क़ाशी, मीनाकारी या छोटे पत्थरों की जड़ाई की जाती है। अंत में इसे पॉलिश कर चमकदार रूप दिया जाता है।

लागत और मूल्यांकन

एक साधारण हाथ फूल सेट में करीब 30 से 55 ग्राम चांदी लगती है। इसका मूल्य ₹4,500 से ₹8,000 तक होता है, जो डिज़ाइन और कारीगरी पर निर्भर करता है। यदि सेट में रंगीन पत्थर, कृत्रिम मोती या मीनाकारी जोड़ी जाए, तो लागत ₹500 से ₹1,500 तक बढ़ सकती है। वहीं, बिछिया की कीमत लगभग ₹200 से ₹400 प्रति जोड़ी होती है। कुल मिलाकर एक संपूर्ण सेट (हाथ फूल और चार से पांच बिछिया) ₹5,000 से ₹10,000 तक में तैयार हो सकता है।

विशेष बातें

आजकल बाजार में पारंपरिक और आधुनिक डिज़ाइनों का आकर्षक मिश्रण देखने को मिलता है। विवाह, त्यौहार और अन्य शुभ अवसरों पर इसकी मांग बढ़ जाती है। चांदी के ये आभूषण न केवल टिकाऊ होते हैं, बल्कि इन्हें स्थानीय कारीगर अपनी निपुणता और कला से जीवंत बना देते हैं। इसीलिए चांदी का हाथ फूल और बिछिया सेट हर महिला के लिए सौंदर्य और परंपरा का एक अमूल्य प्रतीक बन चुका है।

Manoj Shukla

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मै मनोज कुमार शुक्ला 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है।

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