Singrauli News:- देवसर की सड़कें आज सिर्फ आवागमन का रास्ता नहीं रहीं, बल्कि धीरे-धीरे “मौत का राजमार्ग” बनती जा रही हैं। बीच बाजार से गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) आए दिन हादसों का गवाह बन रहा है। सवाल उठ रहे हैं—क्या इसके लिए सिर्फ प्रशासन जिम्मेदार है या फिर इसमें स्थानीय जनता और व्यापारियों की मानसिकता भी बराबर की भागीदार है?
बाईपास की मांग वर्षों से उठती रही है। व्यापारी और नागरिक अब आंदोलन की बात कर रहे हैं, जो अपनी जगह जायज़ भी है। भारी वाहनों का बाजार के बीच से गुजरना खतरे को बढ़ाता है। लेकिन इसके साथ एक कड़वा सच यह भी है कि देवसर का बाजार क्षेत्र लंबे समय से अतिक्रमण की गिरफ्त में है। प्रशासन द्वारा कई बार समझाइश दी गई, अतिक्रमण हटाया गया, फिर भी हालात जस के तस बने रहे।
Singrauli News:- कई दुकानदार अपनी दुकानें इस कदर आगे तक बढ़ा लेते हैं कि फुटपाथ तो दूर, सड़क तक कब्जा हो जाता है। इसके ऊपर से दुकानों के सामने खड़े वाहन आधी सड़क घेर लेते हैं। ऐसे में तेज रफ्तार वाहन, पैदल राहगीर और दोपहिया चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। सवाल यह है कि जब चेतावनी के बाद भी लोग सड़क को निजी इस्तेमाल की जगह समझने लगें, तो दोष सिर्फ प्रशासन का कैसे माना जाए?
Singrauli News:- प्रशासन की जिम्मेदारी बेशक है—यातायात व्यवस्था, बाईपास निर्माण और सख्त कार्रवाई उसकी प्राथमिकता होनी चाहिए। लेकिन जनभागीदारी और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार के बिना कोई भी व्यवस्था सफल नहीं हो सकती। सड़क सिर्फ सरकार की नहीं, जनता की भी होती है।
अब वक्त है आत्ममंथन का। अगर हर हादसे के बाद सिर्फ प्रशासन को कोसना आसान रास्ता है, तो समाधान मुश्किल रहेगा। जब तक नियमों का पालन, अतिक्रमण से दूरी और जिम्मेदार सोच नहीं आएगी, तब तक देवसर की सड़कें यूं ही सवाल पूछती रहेंगी—गलती किसकी है, सड़क की या सोच की?
