सोन घड़ियाल अभयारण्य में गूंजी किलकारियां,तीन मादा घड़ियालों के अंडों से निकले नन्हे मेहमान, 90 बच्चों के जन्म की उम्मीद
सीधी जिले के सोन नदी के किनारे बसे सोन घड़ियाल अभयारण्य से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। सीधी जिले के अमिलिया थाना क्षेत्र अंतर्गत जोगदहा घाट में तीन मादा घड़ियालों के अंडों से बच्चों का निकलना शुरू हो गया है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अब तक तीन मादा घड़ियालों के घोंसलों से बच्चे बाहर आ चुके हैं, जबकि तीन अन्य मादा घड़ियालों के अंडों से भी जल्द ही बच्चों के निकलने की संभावना है। इस वर्ष अभयारण्य में करीब 90 या उससे अधिक घड़ियाल शावकों के जन्म का अनुमान लगाया जा रहा है।
घड़ियालों के प्राकृतिक प्रजनन की यह सफलता सोन घड़ियाल अभयारण्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नदी तंत्र में घड़ियालों का सफल प्रजनन उस क्षेत्र की जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन का सकारात्मक संकेत होता है।
सोन घड़ियाल अभयारण्य की स्थापना वर्ष 1981 में “प्रोजेक्ट क्रोकोडाइल” के तहत घड़ियाल संरक्षण और उनकी संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। यह अभयारण्य सोन, बनास और गोपद नदियों के लगभग 210 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और देश के महत्वपूर्ण घड़ियाल संरक्षण क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां घड़ियालों के अलावा मगरमच्छ, भारतीय सॉफ्टशेल कछुए, दुर्लभ इंडियन स्कीमर पक्षी सहित अनेक जलीय जीव पाए जाते हैं।
बीते वर्षों में अवैध रेत खनन, नदी तटों के क्षरण और मानवीय हस्तक्षेप के कारण यहां घड़ियालों की संख्या प्रभावित हुई थी, लेकिन वन विभाग द्वारा संरक्षण प्रयासों और निगरानी बढ़ाए जाने से अब सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगे हैं।
जोगदहा घाट को सोन घड़ियाल अभयारण्य का प्रमुख प्रजनन क्षेत्र माना जाता है। वर्तमान में नवजात घड़ियाल शावकों और उनके घोंसलों की विशेष निगरानी की जा रही है ताकि उन्हें किसी प्रकार का खतरा न हो। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह संरक्षण कार्य जारी रहे तो आने वाले वर्षों में सोन घड़ियाल अभयारण्य देश के प्रमुख प्राकृतिक घड़ियाल प्रजनन केंद्रों में अपनी पहचान और मजबूत कर सकता है।
वन्यजीव संरक्षण की दिशा में यह सफलता न केवल सीधी जिले बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय बन गई है।

