रेल के लिए रेल रोको! भदौरा में उग्र हुआ जनआंदोलन, मालगाड़ी रोकी, पटरियों पर लेटे हजारों लोग
सीधी।
रेलवे इंटरसिटी ट्रेन के स्थायी स्टॉपेज एवं शंकरपुर–भदौरा रेलवे स्टेशन को पूर्ण स्टेशन का दर्जा दिलाने की मांग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। बुधवार को भदौरा रेलवे स्टेशन परिसर में जेल भरो आंदोलन के अगले चरण के रूप में रेल रोको आंदोलन शुरू किया गया, जिसने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
समाजसेवी आनंद सिंह (ददुआ) के नेतृत्व में शुरू हुए इस आंदोलन के दौरान आक्रोशित लोगों ने एक मालगाड़ी को रोक दिया। देखते ही देखते हजारों की संख्या में महिला-पुरुष, युवा और बुजुर्ग रेलवे पटरियों पर बैठ गए और कई लोग पटरियों पर लेटकर विरोध दर्ज कराने लगे। पूरा आंदोलन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन जनता के तेवर बेहद सख्त नजर आए।
सुबह से ही स्टेशन क्षेत्र में भारी भीड़ जुटने लगी थी। नारेबाजी के बीच आंदोलनकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित आदेश और ठोस कार्रवाई चाहिए। आनंद सिंह (ददुआ) ने कहा कि वर्षों से इंटरसिटी स्टॉपेज, स्टेशन मास्टर की पदस्थापना और पैसेंजर ट्रेनों की बहाली की मांग की जा रही है, लेकिन हर बार रेल प्रशासन ने जनता की अनदेखी की।
रेल संघर्ष समिति ने बताया कि कोरोना काल में बंद की गई चार पैसेंजर ट्रेनें आज तक बहाल नहीं हुईं, जिससे गंभीर मरीजों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को जबलपुर, रीवा और अन्य बड़े शहरों तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह केवल रेल सुविधा का मुद्दा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़ा सवाल है।
रेल रोको आंदोलन की सूचना मिलते ही रेलवे और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया और अधिकारियों द्वारा आंदोलनकारियों से बातचीत की कोशिश की जा रही है। हालांकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
आंदोलन में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इसे सर्वदलीय स्वरूप दे दिया है। महिलाओं और युवाओं की बड़ी भागीदारी ने आंदोलन को और मजबूती दी है।
